अगर किसी से उसकी सबसे पसंदीदा चीज छीन ली जाए और वह मुस्कुराकर स्वीकार कर ले तो समझ लेना कि वहीं से महापुरुष बनने की शुरुआत हो चुकी है।
परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय रत्नसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब
जब दीक्षा के बाद वे जब मुनि अवस्था में थे, तब उनके हाथ में एक बार Hero Pen आई। उस समय में Hero Pen का जबरदस्त Craze था।
पूज्य रत्नसुंदर महाराज साहेब की नज़र Hero Pen के उस चमकते हुए Golden Pen पर गई और उनका मन उसके प्रति आकर्षित हो गया।
दूर बैठे उनके गुरुदेव परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय भुवनभानु सूरीश्वरजी महाराज साहेब सब समझ गए और महात्मा को अपने पास बुलाया और पूछा कि “रत्नसुंदर महाराज, कैसी लग रही है ये Pen?”
महाराज साहेब ने मुस्कुराते हुए कहा “गुरुदेव, एकदम मस्त.. ज़ोरदार!” गुरुदेव ने तुरंत अन्य महात्मा को आदेश दिया ‘काला रंग लाओ’ और उसी Golden ढक्कन को पूरा काला कर दिया।
पूज्य रत्नसुंदर महाराज साहेब बस देखते रह गए और शायद वहीं पर गुरुदेव ने बहुत बड़ा पाठ सिखा दिया कि ‘अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो Hero Pen की चमक भी छोड़नी पड़ेगी।’
कुछ सालों के बाद एक बार की बात है। पालनपुर के खोड़ा लिमडा उपाश्रय में दोपहर का सन्नाटा था। करीब ढाई बजे, गुरुदेव ने आवाज़ दी “रत्नसुंदर महाराज, आपको पुस्तक लिखनी है।”
महाराज साहेब चौक गए कि “गुरुदेव मैं? मैं तो एक पत्र भी किसी से Dictate करवाए बिना नहीं लिख सकता और आप पूरी पुस्तक की बात कर रहे हैं?”
गुरुदेव ने बस इतना पूछा “आपको मेरे वचन पर विश्वास है या नहीं?” महाराज साहेब झुक गए और गुरुदेव की गोद में सर रखकर कहा कि “गुरुदेव। आपके विश्वास पर ही तो मैंने संसार छोड़ा है। वासक्षेप डालिए और आशीर्वाद दीजिए।”
दोपहर 2:30 बजे गुरुदेव ने पूज्यश्री को आशीर्वाद दिया और 2:35 बजे पूज्यश्री के हाथ में कलम आई और फिर वो कलम अब तक, आज तक अस्खलित धरा से चलती ही जा रही है।
जो व्यक्ति एक पत्र खुद नहीं लिख सकता था, वही आगे चलकर बने सरस्वती-लब्ध-प्रसाद, पद्मभूषण से सम्मानित महान जैन आचार्य भगवंत परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय रत्नसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब।
आज वे 500 पुस्तक की मंजिल पर पहुँच चुके हैं।
और आज वही कलम.. वही विश्वास.. इतनी उचाई तक पहुंच गया है कि 07th Jan 2026 से 12th Jan 2026 को हो रहे URJAA MAHOTSAV के भव्य लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया है।
जिसके अंतर्गत 11th January 2026 के दिन Richardson & Cruddas Jumbo Facility Centre, Mumbai में आचार्य श्री की 500वीं पुस्तक “प्रेमनुं विश्व, विश्वनो प्रेम” राष्ट्र के सबसे बड़े मंच पर सम्मानित होने जा रही है।
इस 500वीं पुस्तक का विमोचन और कोई नहीं बल्कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी करने जा रहे हैं।
यह किसी साधु की जीत नहीं। यह विश्वास की जीत है। यह गुरु-शिष्य परंपरा की जीत है और यह प्रमाण है कि महापुरुष पैदा नहीं होते, गुरु की नजरों से देखे जाते हैं, गुरु की कसौटी पर तपते हैं, फिर जगत में चमक उठते हैं।
हम में से ज़्यादातर लोग शायद अपनी पूरी Lifetime में 500 पुस्तक पढ़ नहीं पाएंगे और इन्होंने 500 किताबें ही नहीं बल्कि 500 ग्रन्थ समान विराट साहित्य दुनिया को दे दिए, दुनिया को सौंप दिया।
ऐसे महापुरुष इतिहास पढ़ते नहीं, इतिहास रचते हैं, इतिहास बनाते हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि 11th Jan 2026 को यह इतिहास रचते हुए हम अपनी आँखों से देख पाएंगे।


