500 वर्षों के इतिहास में पहली बार, एक ऐसा छः रि पालित संघ, जिसने सिर्फ यात्रा नहीं की बल्कि एक सोच को ज़मीन पर उतरते हुए दिखाया कि जब Proper Vision हो, तो छः रि पालित संघ समाज के लिए क्या-क्या कर सकता है।
युगप्रधान आचार्यसम परम पूज्य पंन्यास प्रवर श्री चंद्रशेखर विजजी महाराज साहेब के शिष्यरत्न गिरनार तीर्थोपदेशक परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री धर्मरक्षित सूरीश्वरजी महाराज साहेब के शिष्यरत्न
तपोगगन चंद्रमाँ परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री हेमवल्लभसूरीजी महाराज साहेब आदि ठाणा की निश्रा में 500 वर्षों के इतिहास में पहली बार अजाहरा से गिरनारजी महातीर्थ का 18 दिनों के छःरि पालित संघ यात्रा का आयोजन हुआ।
इस संघ की कुछ ऐसी अद्भुत विशेषताएं थी जिसे जानकर हम भी शायद कहेंगे कि संघ हो तो ऐसा हो। आइए इस अद्भुत संघ यात्र की कुछ अद्भुत बातें जानने का प्रयास करते हैं।
बने रहिए इस Article के अंत तक..
संघ यात्रा की विशेषताएं
संघ यात्रा के दौरान अजाहरा, प्रभासपाटण, वेरावल, आदरी, चोरवाड, मांगरोल, वंथली आदि तीर्थों में दर्शन पूजा भक्ति आदि हुई। इतना ही नहीं यात्रा के मार्ग में कई गृह जिनालयों एवं संघ जिनालयों के भी दर्शन हुए।
इस मार्ग से 500 वर्ष में कभी संघ निकला ही नहीं था तो कई आराधकों ने इन तीर्थों की भक्ति अपने जीवन में पहली बार की। अब लग रहा है कि इन सभी तीर्थों का अभ्युदय काल शुरू हुआ है।
वेरावल, आदरी, चोरवाड, मांगरोल, इन गाँवों में ध्वजारोहण का लाभ संघ को मिला एवं आदरी तीर्थ का जिर्णोद्धार हुआ एवं आदिनाथ-नेमिनाथ भगवान आदि जिनबिंब एवं गुरु प्रतिमाजी और शासनदेवी की प्रतिष्ठा हुई।
सबसे Important बात यह थी कि मार्ग में आनेवाले तीर्थों में, जिनालयों में यथासंभव साधारण खाता में लाभ लिया गया, पुजारीओं का, कर्मचारियों का बहुमान किया गया, आर्थिक रूप से कमज़ोर साधर्मिक भाई बहनों की उचित रूप से भक्ति की गई।
Evergreen Without Green
आराधक अपने अपने हिसाब से नहीं बल्कि हर रोज़ संघ प्रयाण के पहले सभी आराधक आचार्य श्री की निश्रा में सामूहिक देववंदन करने के बाद लगभग सुबह 6.45 AM को विहार करते जब थोडा उजाला हो जाता था।
यह जानकर शायद हम भी चौंक जाएँगे कि संपूर्ण संघ यात्रा के दौरान विराधना से बचने के लिए पूरी तरह से लिलोत्री का त्याग रखा गया अर्थात् Green Vegetables, Fruits आदि का संपूर्ण त्याग था।
पूज्य आचार्य श्री हेमवल्लभसूरीजी म.सा. के लिए कहा जाता है Evergreen Without Green.. बस यही सूत्र सभी आराधकों ने अपनाया।
जब सैकड़ों आराधक एक ही समय, एक ही नियम और एक ही भावना से चलते हैं तब केवल आराधना नहीं होती, शासन स्वयं दिखाई देने लगता है।
हर कदम पर शासन प्रभावना
संघ मार्ग के गावों में 15 जगह पाषाण के प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया जिस पर एक तरफ अजाहरा पार्श्वनाथ और दूसरी तरफ नेमिनाथ परमात्मा की दर्शनीय प्रतिमाजी की स्थापना की गई। बीच में धर्मचक्र, नवकारमंत्र, सिद्धचक्रजी एवं अष्टमंगल की प्रतिकृतियाँ भी ग्रेनाइट में उत्कीर्ण की गईं।
जब भी संघ का प्रयाण एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव पर होता तो उस दौरान लगभग 5000 खजूर-मिठाई के Packets वहां के Locals को, जैनेत्तरों को देकर उनका मुंह मीठा कराया जाता और श्री संघ की प्रभावना का प्रयास किया जाता।
अरिहंत परमात्मा की प्रसादी के रूप में 9500 KG के लगभग 19000 मिठाई के Packets हमारे कार्यकर्ताओं ने घर घर जाकर वितरण किए और घर घर जाकर भगवान महावीर का संदेश, संघ क्या होता है आदि यह सब बातें समझाई।
जन जन की सेवा के उद्देश्य से 1 General Ambulance भी सेवा में लगाईं गई थी। यह सब दिखने में छोटे काम लग सकते हैं, सुनने में बहुत Normal लग सकता है लेकिन इन्हीं से शासन आम लोगों के ह्रदय में उतरता है।
संघ में सेवा दे रहे लगभग 800 कर्मचारियों को नए कपडे दिए गए, उनको परमात्मा के दर्शन करवाए गए एवं उन्होंने प्रभु के सामने नृत्य भक्ति भी की। सभी कर्मचारियों को व्यसन मुक्ति की प्रेरणा दी गयी और कुछ ने व्यसनों का त्याग भी किया।
शासन प्रभावना केवल मंदिरों और प्रतिमाओं तक सीमित नहीं थी। इस संघ ने ये भी दिखाया कि करुणा केवल मनुष्यों तक नहीं, हर जीव तक पहुँचनी चाहिए।
जीवदया का कार्य
संघ यात्रा के दौरान जीवों के प्रति प्रेम एवं करुणा के अलग अलग कार्य हुआ जिसमें पांजरापोलों में घास एवं उचित दान भी दिया गया, किडियारा के माध्यम से चींटियों को आहार खिलाया गया।
संघ मार्ग में पशुओं के लिए Veterinary Ambulance यानी पशुओं के लिए Ambulance की व्यवस्था की गई थी जिसने मार्ग में आते गाँवों के पशुओं का इलाज किया। संघ मार्ग में पक्षियों के आहार के लिए 22 चबूतरों का निर्माण किया गया।
52 उंट गाड़ियों को साथ रखा गया था जिससे उन ऊँटों को जीवनदान मिले एवं उनपर Dependent Families का भी भरण पोषण हो जाए। ऊँट हाथी आदि को आराधकों के द्वारा विशिष्ट आहार खिलाया गया।
जब इस तरह से संघ यात्रा में जब हाथी घोड़े ऊंट आदि का उपयोग होता है तब कुछ बुद्धजीवियों को ऐसा लगता है कि ‘इनके साथ क्रूरता हो रही है।’ आज कुछ लोग इसे देखकर ज़रूर सवाल उठाएँगे।
उन सवालों पर हम अलग से ज़रूर बात करेंगे।
जहाँ पर जीवों के प्रति इतनी संवेदनशीलता हो, वहाँ अगली पीढ़ी के लिए सोचना स्वाभाविक हो जाता है और यही सोच इस संघ को बच्चों तक ले गई।
संस्कारों का बीजारोपण
संघ मार्ग में 41 Schools में सरस्वती देवी की देरी का निर्माण कराया गया एवं 41 सरस्वती माता की प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। सभी जगह आचार्य भगवंत स्वयं पधारते थे एवं प्रवचन भी होते थे चाहे इन्हें अगले पड़ाव पर पहुँचते पहुँचते 11-12 भी क्यों ना बज जाए।
उन Schools में लगभग 9300 बच्चों को 1 Kit भेंट के रूप में दी गई जिसमें Notebooks, Pen, Drawing Kit आदि Stationary Items एवं Chocolates भी थी। इन सभी Schools के Teachers का भी विशेष बहुमान किया गया।
उन बच्चों में अच्छे संस्कार आए, अच्छे संस्कार उनके जीवन में उतरे एवं भविष्य में भी वे संस्कार टिके रहे और भावी भारत का भविष्य उज्जवल बने इस संकल्प से 43 संस्कार शाला Sessions का आयोजन हुआ।
जिसमें लगभग 9300 बच्चों ने भाग लिया और उनमें संस्कारों का सिंचन हो वैसी Textbooks उन्हें दी गई, यह कार्य Digital Jain Pathshala के साथ मिलकर किया गया। इतना कुछ होना संयोग नहीं था.. इसके पीछे एक शक्ति काम कर रही थी।
आयम्बिल का ऐतिहासिक संकल्प
पूज्य श्री की पावन Aura में आयम्बिल की लहर चली जिसमें प्रतिदिन Average 150 आयम्बिल होते थे एवं संपूर्ण 18 दिनों में कुल 2890 आयम्बिल हुए। लगभग 100 आराधकों ने तो संपूर्ण 18 दिन आयम्बिल तप करके संघ यात्रा पूर्ण की।
सोने पे सुहागा – पूज्य आचार्य श्री की पावन प्रेरणा से एक ही दिन में लगभग 400 आराधकों ने 500 आयम्बिल करने का सामूहिक पच्चक्खाण लिया यानी 2,00,000 आयम्बिल करने का शुभ संकल्प आराधकों द्वारा लिया गया।
यह संघ केवल एक यात्रा नहीं थी.. यह एक संदेश था कि Proper Vision हो तो धार्मिक अनुष्ठान समाज, जीव और भविष्य तीनों को बदल सकता है एवं उत्तम शासन प्रभावना हो सकती है।


