प्रस्तुत है U-Turn Series का Episode 04.
November 2023 में अब भाविन भाई ने जीवन अंत करने का फैसला लेकर माता-पिता से अनुमति ले ली थी। इतना हमने U-Turn Series के Episode 03 में देखा। इनकी पूरी Life Story आप U-Turn पुस्तक प्राप्त कर पढ़ सकते हैं।
मुंबई वापसी
7-8 दिन चर्चा हुई कि किस तरह जीवन अंत करना। अंत में निर्णय लिया कि 9th November 2023 को Train की पटरी के नीचे सोकर जीवन अंत कर देते हैं लेकिन उस विचार से घबराहट शुरू हुई तो Decision Change किया कि नहीं आत्महत्या नहीं करनी है, परंतु भाग जाते हैं।
वर्षों पहले जैसे डोम्बिवली छोड़कर भागे थे वैसे ही वापस इधर से भागकर कहीं और चले जाते हैं।
इस तरह से Decision Change करने के पीछे कारण यह था कि भाविन भाई ने सोचा कि ‘मेरे नाम की एक करोड़ की LIC Policy थी, मैं मर जाऊ तो माता-पिता को एक करोड़ की धन राशि मिलेगी। उसमें ये लोग सबका कर्ज भी चुका देंगे और बाकी बचे 30-40 लाख में शांति से जीवन बिताएंगे।’
लेकिन जांच करने पर पता चला कि Natural Death हो तो ही पैसे मिलते हैं, आत्महत्या करने पर एक रूपया भी नहीं मिलेगा इसलिए Decision Change किया। Just Imagine ऐसे व्यक्ति के माता-पिता किस हालातों से गुज़रे होंगे कि उन्हें अपने ही बेटे को आत्महत्या करने के लिए अनुमति देनी पड़ी होगी।
8th November 2023 की रात को भाविन भाई ने दक्षिण भारत का वह शहर छोड़ दिया और 9th November 2023 पहुँच गए मुंबई। साथ में थे थोड़े पैसे, पहनने के 2-3 जोड़ी कपड़े और सभी के लिए एक एक थाली कटोरी और गिलास का सेट और ठंडी से बचने के लिए कंबल रजाई वगैरह बस।
Set किया हुआ घर छोड़कर भागने के लिए भाविन भाई ने अपने माता-पिता को दूसरी बार मजबूर किया। वहां पर तीनों ने Phone बंद कर दिए थे। क्योंकि जिनके पैसे बाकी थे वे अथवा पुलिस फ़ोन करके Track करें तो आसानी से पकडे जा सकते थे।
इससे बचने के लिए माता-पिता का फ़ोन भी तोड़ दिया और तीनों का Sim भी। लेकिन अब क्या? रहना कहाँ? खाना क्या? और करना क्या?
माता-पिता से वियोग
भाविन भाई के पिता को कठोर दिल से कहना पड़ा कि ‘बेटा भाविन, तेरे साथ में रहकर, भाग भागकर हम थक गए हैं। हम सहन कर करके भी अब थक गए हैं। बेटा अब हम अगर अलग हो जाए तो अच्छा है। भगवान की कृपा होगी और भविष्य में वापस मिलने का लिखा होगा तो ज़रूर मिलेंगे।’
माँ आहटें भर-भरकर रोने लगी। भाविन भाई के भी आघात का कोई पार नहीं था। भाविन भाई ने पूछा कि ‘आप कहा जाएंगे?’ आँखों में आंसुओं के साथ पिता बोले कि ‘वीरपुर सौराष्ट्र की तरफ जाएंगे। सुना है वहां बहुत वृद्धाश्रम है, किसी वृद्धाश्रम में सहारा मिल ही जाएगा तो अंतिम जीवन वहां ही बिता देंगे।’
भाविन भाई ने भविष्य का सोचते हुए पूछा कि ‘अगर किसी वृद्धाश्रम ने आपको नहीं रखा तो?’ तो पिता बोले कि ‘फूटपाथ पर रहकर भीख मांगकर पेट भरेंगे। आज भी भारत के लाखों लोग इस तरह से जी ही रहे हैं ना।’
पिता के इस उत्तर में कोई कटाक्ष नहीं था। भाविन भाई को थोडा सुना देता हूँ वो टोन भी नहीं था। शब्दों में सत्य था। हकीकत थी और चुपचाप स्वीकारा जा सके ऐसा भविष्य था बस। भाविन भाई ने सोचा कि एक युवान बेटा है और माता-पिता को वृद्धाश्रम की ओर जाना पड़ रहा है।
जो कमाया हुआ था वह भी गँवा दिया ऊपर से कर्ज का बोझ चढ़ाया वह अलग। खुद के ऊपर धिक्कार महसूस हो रहा था कि ;धत्त ये मैंने क्या कर दिया कहाँ थे और कहाँ लाकर रख दिया माँ बाप को।’ अब आगे कोई Option नहीं था।
इसलिए भाविन भाई ने अपने पिता के पैरों में गिरकर आशीर्वाद लिए। भाविन भाई के पापा रोते हुए बोले कि ‘बेटा बस अब गलत कदम मत उठाना।’ सिर्फ इतना कहा और उनका गला अटक गया। माँ के चरणों में गिर पड़े और माँ भी अपने बेटे के गले लगकर जोर जोर से रोने लगी।
क्योंकि अब वह माँ अपने बेटे से हमेशा हमेशा के लिए अलग होनेवाली थी।
माँ ने पूछा ‘बेटा तू कहाँ जाएगा?’ और अचानक भाविन भाई को तेलंगाना राज्य का लगभग 1400 वर्ष प्राचीन तीर्थ श्री कुलपाकजी तीर्थ याद आ गया। इस तीर्थ की भाविन भाई ने दो बार यात्रा भी की थी।
वो भव्य प्रतिमाएं, अद्भुत भगवान, शांत वातावरण भाविन भाई को अपनी ओर बुला रहे हो ऐसा महसूस हुआ। भाविन भाई ने अपनी माँ से कहा कि ‘अभी तो मैं कुलपाकजी जाऊँगा और वहां प्रभु की भक्ति करूँगा। बाद में क्या करना वह तो भगवान ही जाने।’
माता-पिता के पास थोड़े पैसे थे तो वो पैसे लेकर वे पहुंचे सौराष्ट्र के वीरपुर और भाविन भाई मुंबई से पहुंचे हैदराबाद और वहां से कुलपाकजी तीर्थ। 5 दिन वहां पर रुक गए।
भयानक Confession
लगभग 11th November 2023 से 15th November 2023।
इन पांच दिनों में आई दिवाली। 13th 14th और 15th यह तीनों दिन वहां पर मंगल के लिए आयम्बिल किए। बहुत भाव से प्रभु भक्ति की। परमात्मा से एक मांग की कि ‘हे प्रभु, सच्चा रास्ता दिखाना।’ बहुत तीव्र भावना से प्रार्थना की थी और भगवान ने सुन ली।
उनके आयम्बिल सफल हुए…
अब तक जितना हमने भाविन भाई के बारे में सुना है वह सब सुनकर शायद हमें गुस्सा आया होगा, नफरत हो गई होगी कि ऐसा बेटा किसी माँ-बाप को ना मिले, ऐसा व्यक्ति मेरे सामने आए तो अक्कल ठिकाने लगा दूँ। Etc Etc।
इतने गलत काम करने के बाद ऐसे व्यक्ति को कौन स्वीकारेगा? लेकिन ऐसे व्यक्ति को भी भगवान स्वीकारते हैं, ऐसे व्यक्ति की भी प्रार्थना हमारे परमात्मा सुनते हैं। बस इसिलए वे परमात्मा बन पाए।
भाविन भाई को Judge करने से पहले थोडा रुकना होगा। कहीं ऐसा ना हो कि बाद में हमें पछताना पड़े कि अरे बाप रे इस व्यक्ति के बारे में मैंने कितना भला बुरा सोचा।
तीर्थ से पहुंचे हैदराबाद। वहां पर परम पूज्य पंन्यास श्री विरागरत्न विजयजी महाराज साहेब जो अब आचार्य है उनके साथ रहे पूज्य देवर्षिरत्न विजयजी महाराज साहेब मिले। उनको सब कुछ बता दिया।
उन्होंने भाविन भाई को विजयवाडा उपधान में जाने की प्रेरणा की और साथ में एक चिट्ठी लिखकर दे दी। यह वहीँ चिट्ठी थी जो भाविन भाई ने पूज्य गुणहंस विजयजी महाराज साहेब को दी थी जो हमने Episode 01 की शुरुआत में देखा था।
उस चिट्ठी के बाद भाविन भाई श्री अरिहंत धाम तीर्थ में आयोजित उपधान में बैठे और प्रवचन सुनते सुनते उन्हें खुद के दोष नज़र आने लगे। वहां के मूलनायक श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ परमात्मा के पास जाकर प्रार्थना की और आलोचना यानी Confession लिखना शुरू किया।
सच्चे भावों के साथ बिना कोई माया कपट किए भाविन भाई ने 120 Pages में अपनी पूरी कहानी यानी भव आलोचना महात्मा को लिखकर दे दी जिसमें से जितना लोगों के लिए उचित हैं, जिसे जानकर लोगों का भला हो उतनी बातें महात्मा ने U-Turn पुस्तक में लिखी।
बचपन की आदतें
भाविन भाई उपधान में किसी के साथ बात नहीं कर रहे थे, Mingle नहीं हो रहे थे। उन्हें डर था कि ‘अगर मैंने कहा कि मैं इस इस जगह से आया हूँ और अगर बात वहां तक पहुँच गई तो जिनके पैसे बाकी है वे सब यहाँ आ जाएंगे।’
भाविन भाई की सोच यह थी कि ‘किसी भी ग्रुप के साथ जुड़ने में भी बहुत डर है क्योंकि कोई पूछे कि क्या करते हो? परिवार में कौन कौन हैं? कहाँ रहते हैं? ऐसा कुछ पूछ लिया तो सही उत्तर देने की मेरी ताकत नहीं है और अब गलत बोलने का पाप करना नहीं है।’
झूठ के पीछे ही पूरी ज़िन्दगी कहाँ से कहाँ आ गई इसिलए अब झूठ से ही नफरत हो गई थी।
भाविन भाई ने अपने इतिहास का वो दिन भी बताया कि जहाँ से उन्हें झूठ बोलने की गलत आदत लग गई। स्कूल में Competition हारने के बावजूद फ़ालतू में घर आकर झूठ बोला कि मैं 2nd आया और First 3 Winners को इनाम के तौर पर चॉकलेट मिली है।
इस छोटे से झूठ से उन्हें झूठ बोलने की आदत लगी और पूरा जीवन बर्बाद हो गया। इस दौरान शेयरबाज़ार में Trading के दौरान गंदी गंदी गालियाँ सीख ली थी। इस दौरान जब पिता उन्हें रोकते तो भाविन भाई अपने ही पिता को बहुत Rudely जवाब देते।
विनय नाम का गुण भी खो बैठे..
सत्य नाम का गुण भी खो बैठे..
इनकी दादी का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। एक व्यसनी अपने जीवन में सिर्फ व्यसन नहीं बल्कि दुर्गुण भी साथ ले आता है। शेयरमार्किट का गुस्सा कई बार भाविन भाई अपनी ही दादी पर निकालते।
उनकी उम्र हो गई थी तो कई बार Bed पर ही Toilet कर देते थे तो भाविन भाई उन्हें सुना देते थे कि ‘जानबूझकर आलस के कारण ऐसा कर रही है।’ उनके साथ भी बहुत बुरा व्यवहार किया था। और ना जाने कितने लोग भाविन भाई को मन ही मन बद्दुआ दे रहे थे, गालियाँ दे रहे थे।
कितनों की शांति भाविन भाई की इस सट्टा लगाने की लत ने भंग की थी।
माता-पिता की कमी
इस तरह उन्होंने अपने सारे पाप आलोचना में लिखकर दे दिए। अंत में भाविन भाई ने लिखा कि ‘गुरुदेव 10th November 2023 को हम अलग हुए थे। उस दिन अंतिमबार अपने माता-पिता से मिला था। आज 5th January 2024 को यह सब लिख रहा हूँ।
10 दिन बाद मेरी मोक्षमाला है लेकिन नसीब देखिए। मेरे माता-पिता कहाँ है? वह आज मुझे पता ही नहीं है। अब वापस माँ-बाप मिलेंगे भी या नहीं यह भी एक बहुत बड़ा प्रश्न है। आज पता चलता है माँ का प्रेम क्या होता है। बाप की डांट का क्या महत्त्व है।
मेरे लिया उस माँ को कितनी पीड़ा हो रही होगी। उस जीव को तकलीफ देने में मैंने कोई कमी नहीं रखी।’ भाविन भाई ने महात्मा से कहा कि ‘गुरुदेव, मैंने सिर्फ माँ-बाप की नहीं बल्कि मेरे जैन धर्म की भी आशातना की है, घोर अपमान किया है।
एक बार दोस्तों के बीच कहा था कि जैन धर्म My Foot। जैन धर्म तो मेरे पैरों की जूती है। आज उस भूल का एहसास हो रहा है। जिस जैन धर्म को मैंने गाली दी उसी जैन धर्म ने मुझे Unconditionally स्वीकारा, मेरे भगवान ने मुझे स्वीकारा। आप गुरु भगवंतों ने मुझे स्वीकारा।
मेरे पाप जब उदय में आएंगे तब क्या होगा वह सोचकर ही भय लगता है। मैं जब दक्षिण में उस कंपनी में काम कर रहा था तब एक तरफ गलत धंधे कर रहा था तो दूसरी तरफ मैं अच्छा हूँ, धार्मिक हूँ यह दिखाने के लिए दो काम करता था।
रोज़ की 50 रुपयों की रोटी गरीबों को देता और रोज़ सुबह पूजा करने जाता था जिससे मेरी धार्मिकता को देखकर भी, मुझे अच्छा इंसान मानकर मेरे जाल में लोग फंस गए। आज तो वे मेरे कारण धर्म को भी गाली देते होंगे, जैन धर्म पर द्वेष करते होंगे। पता नहीं मेरा क्या होगा।’
भाविन भाई का कहना था कि ‘माँ-बाप को वंदना यह गीत सुना तो ऐसा लगा कि मैंने मेरे माता-पिता के जीवन में सिर्फ और सिर्फ कांटे भरे हैं। आज भी मुझे विश्वास है कि वे दोनों इतना कुछ होने के बावजूद भी कोसते नहीं होंगे और मेरा हित हो यही चिंता करते होंगे।
आज लगभग 55 दिन हो गए हैं उनसे अलग हुए। आज माँ-बाप की असली कीमत पता चल रही है। साथ थे तब माँ ने कितना कुछ किया लेकिन मेरे मुंह से कभी एक तारीफ नहीं निकली। पिता ने इतनी बार समझाया लेकिन उनकी सुनी नहीं।
मैंने मेरी माँ को माँ नहीं बल्कि बिना वेतन की नौकरानी ही समझी। माँ ने कभी कोई Demand नहीं की। ना ही कोई Complaint। कुदरत ने माँ को अलग किया तो अब सब समझ में आ रहा है। मैंने जगत का सबसे निःस्वार्थ प्रेम खो दिया।
लेकिन अब मैंने मेरे जीवन का सबसे श्रेष्ठ काम किया-उपधान। मेरी मोक्षमाला में तो कोई नहीं आनेवाला है। बस सिर्फ माता-पिता भी होते तो चल जाता।
उन्हें यह सब बदलाव देखकर बहुत आनंद आता कि यह मेरा शैतान बेटा संत जैसा बन गया यह देखकर बहुत आनंद आता लेकिन अब तो यह सब कैसे संभव है।’ इस तरह से भाविन भाई ने अपने जीवन की पूरी बात भव आलोचना में लिखकर दे दी।
मोक्षमाला को 10 दिन बाकी थे। क्या भाविन भाई को अपने माता-पिता मिलेंगे? क्या माता-पिता अपने इस कु से सु पुत्र हुए भाविन भाई की मोक्षमाला देख पाएंगे? क्या इन तीनों का मिलन फिर से हो पाएगा?
जानेंगे Episode 05 में।
यदि आप “U-Turn” Book की Soft Copy यानी PDF Online पढना चाहते हैं तो नीचे दी गई Link पर Click कीजिए 👇
https://drive.google.com/drive/u/0/mobile/folders/1hCZylVMmLQC7MFcOfu3kYiMjm_fSCsX6
यदि आप “U-Turn” Book की Hard Copy प्राप्त करना चाहते हैं तो इस Link पर Click कीजिए 👇
https://docs.google.com/spreadsheets/d/1kYmewidnxHbz6qC6YB8-fJqAx5GsmuduE3VoLI-LMms/edit?gid=0#gid=0


