तपस्या करना चाहते हैं लेकिन शरीर साथ नहीं देता? या फिर तपस्या शुरू करते ही स्वास्थ्य बिगड़ जाता है?
आज हम आपको एक ऐसा सरल विज्ञान बताएँगे, जिससे तपस्या करना न सिर्फ आसान होगा बल्कि शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
ये ज्ञान हमें मिला है-परम पूज्य पंन्यास प्रवर श्री निर्मोहसुंदर विजयजी महाराज साहेब द्वारा लिखित ‘आहारकार्ड’ पुस्तक से।
तो आइए तपस्या को लेकर शरीर के अंदर रहे Natural Signal System को समझने का प्रयास करते हैं, सिर्फ 10 Points में। बने रहिए इस Article के अंत तक।
1. तपस्या हो या पारणा, एक नियम हमेशा याद रखना है
‘जिसका पेट साफ़, उसके सब गुनाह माफ़।’
हमारे शरीर में पहले से ही एक Self Signal System है, जो हर समय हमें Signal देता है कि कब खाना है, कब नहीं खाना है, कब पानी पीना है और कब रुक जाना है।
जैसे शहरों में Traffic Signal हमें गाड़ियाँ चलाने या रोकने का इशारा देता है, वैसे ही शरीर के अंदर भी एक Natural Signal System (NSS) है। आगे हम इसी NSS को विस्तार से समझेंगे।
2. जब हम रोज़ 3–4 बार खाते हैं तो कुल मिलाकर 10–12 रोटियाँ खा लेते हैं। लेकिन तपस्या में, बियाशना में या फिर एकाशना या आयंबिल में-एक बार में ही पूरा दिन निकालना होता है।
ऐसे में अगर हम पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं लेते हैं यानी Nutritious Food नहीं लेते हैं तो शरीर कमजोर पड़ जाता है और मन भी बार-बार पारणा की तरफ भागेगा।
इसलिए यह Formula Apply करना है “Taste को Second Priority और Strength (ताकत) को First Priority।”
जीभ स्वाद से चलती है, लेकिन शरीर ताकत से, यह याद रखना है।
3. परमात्मा महावीर स्वामी ने स्वयं ने अपनी देशना में “स्वरोदेय विज्ञान” बताया था ऐसा पूज्य चिदानंदजी महाराज साहेब एवं श्राद्धविधि के लेखक पूज्यपाद आचार्य भगवंत श्री रत्नशेखर सूरीश्वरजी महाराज डंके की चोट पर लिखते हैं कि
जैसे गलत खाना (Unhealthy Food) बीमारी देता है, वैसे ही गलत समय पर खाना (Untimely Food) भी नुकसान पहुँचाता है।
Just एक बार सोचिए-हमें भोजन सबसे अच्छा कब लगता है? स्वाद अच्छा हो तब? गरम हो तब? नहीं! असली स्वाद तब है जब पेट में भूख हो। इसी तरह पानी भी तभी लाभकारी है जब प्यास लगती हो।
अब सवाल है कि हमें कैसे पता चले कि शरीर को भोजन कब चाहिए और पानी कब चाहिए?
इसका उत्तर है-स्वरोदेय विज्ञान, यानी हमारा Natural Signal System (NSS) अर्थात् नाडी विज्ञान।
4. अब सबसे ज़रूरी Point-नाड़ी विज्ञान यानी स्वरोदेय विज्ञान।
हमारी नाक के दो छिद्र हैं :
- बायां छिद्र=चंद्र नाड़ी (Left Nostril)
- दायां छिद्र=सूर्य नाड़ी (Right Nostril)
जब शरीर को Liquid (पानी आदि) चाहिए तो चंद्र नाड़ी चलती है-Left वाली और जब शरीर को Solid Food चाहिए-भोजन या पचाने की ज़रूरत होती है, तब सूर्य नाड़ी चलती है Right वाली।
इसे Check करना आसान है-आँख बंद करके अपनी उंगली नाक के पास रखें इस तरह से, तुरंत पता चल जाएगा कौन सी नाड़ी चल रही है।
जहाँ से Forcefully साँसे बाहर निकलती हो, वहां से ही अंदर जाती है, और वह ही नाडी Active कहलाती है।
Simple Example-Right Nostril (सूर्य नाड़ी) Active है तो ऐसा समझने है जैसे पेट में तवा गरम है, यानी भट्टी चल रही है, अगर उसी समय ठंडा पानी डाल दिया तो क्या होगा?
शायद वही सरसराहट जैसे डोसा के गर्म तवे पर पानी छिड़कते ही होती है, वही गड़बड़ हमारे पेट में भी हो जाती है।
अरे भाई ठीक है ना इससे Health का क्या लेना देना?
5. अब Health प्रेमियों के लिए एक Important बात-हमारी सभी बीमारियों की जड़ है कमज़ोर Immunity System।
आपने कई बार ऐसा देखा होगा, या फिर अनुभव किया होगा दो लोग एक जैसा खाना खाते हैं, एक जैसा पानी पीते हैं लेकिन एक बीमार पड़ जाता है और दूसरा बिलकुल ठीक रहता है। फर्क है उनकी Immunity का।
यह Immunity पूरी तरह से Depend करती है जठराग्नि पर यानी पेट के Digestive Fire पर। अगर जठराग्नि Strong है तो शरीर, भोजन को अच्छे से Digest करके Energy बना लेता है।
जठराग्नि को आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह शरीर के स्वास्थ्य और बीमारियों से लड़ने की क्षमता को प्रभावित करती है। अगर जठराग्नि कमजोर पड़ गई तो पेट और शरीर दोनों गड़बड़ा जाते हैं।
इसी कारण से Ice Creams, Cold Drinks, एक दम ठंडा फ्रिज का पानी या पेय पदार्थ एवं ऐसी अभक्ष्य चीज़ें जीभ को मज़ा और पेट को सजा देती है।
सिर्फ एक बार सोचिए पेट में जठराग्नि एकदम Strong है यानी क़ गर्म है, पेट की भट्टी जल रही है और उस पेट में अगर आपने Ice Cream डाल दी, ठंडा ठंडा Cold Drinks डाल दिया। एक दम ठंडा फ्रिज का शरबत डाल दिया तो क्या होगा?
हालत ख़राब हो जाएगी।
इतना समझना होगा कि जठराग्नि के असंतुलन से पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे कि अपच, गैस, और कब्ज इत्यादि समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं।
अंदर की अग्नि ठंडा पड़ते ही सारे रोग पनपते हैं। मटके का पानी Natural होने से नुकसान नहीं होता।
6. सोचिए-अगर सड़क के दोनों Opposite Signals एक साथ Green हो जाएं तो क्या होगा?
Accident! – Right?
बिल्कुल वैसे ही शरीर में भी होता है। जब Right Nostril (सूर्य नाड़ी) चल रही हो तो Signal है-भोजन के लिए Green, लेकिन पानी के लिए Red।
उस समय पानी पीया तो Digestive System बिगड़ जाएगा और जब Left Nostril (चंद्र नाड़ी) चल रही हो तो Signal है-पानी के लिए Green, लेकिन भोजन के लिए Red।
याद रखने के लिए इस तरह से याद रखते हैं
- L=Left=Liquid अर्थात् पानी।
- R=सूर्य नाडी=Sun=Solid अर्थात् भोजन।
- Left Liquid और Right Solid.
हमारा Left, हमारा Right, सामनेवाले का नहीं यह ध्यान रखना है इसे उल्टा करना मतलब शरीर से दुश्मनी करना।
7. कई बार स्वादिष्ट चीज़ें देखकर जी ललचा जाता है और हम सोचते हैं कि हमें बहुत भूख लग गई है। पर असली भूख सिर्फ तब होती है जब Right Nostril (सूर्य नाड़ी) चल रही हो।
अब सवाल-पच्चक्खान वाले तो सूर्यास्त के बाद पानी का त्याग करते हैं, अगर Sunset के समय Left Nostril (चंद्र नाड़ी) ही नहीं चली तो क्या करना?
इसका आसान उपाय है-करवट बदलना।
- Right Side करवट लेकर सो जाएंगे तो Left Nostril चालू हो जाएगी।
- Left Side करवट लेकर सो जाएंगे तो Right Nostril चालू हो जाएगी।
ध्यान रहे-इसमें 2–5 मिनट लग सकते हैं, और कभी-कभी तुरंत असर नहीं भी हो सकता। नाडी अनाडी होती है।
इसलिए Sunset से थोड़ा पहले ही नाड़ी देखकर पानी पी लेना चाहिए, ताकि End Moment में BP ऊपर नीचे नहीं करना पड़े।
Please Note: भोजन के पहले और भोजन के बाद 45 Minute से एक घंटे तक पानी नहीं पीना है।
आयंबिल वगैरह में हो सके तो काली मिर्च जिसमें भी डाली हो वह चीज़ Avoid करनी है, क्योंकि काली मिर्च से Headache, Vomiting जैसी Problems हो सकती है।
एक और बात याद रखनी है-Eat Water, Drink Food. भोजन को इस तरह से खाना है जैसे पानी पी रहे हैं यानी कवल चबा चबाकर मुंह में ही Juice जैसा बना देना है और फिर गले से नीचे उतारना है।
अच्छे से चबाने पर लार (Saliva) भोजन के साथ अच्छे से मिलती है। लार में मौजूद Enzymes (जैसे Salivary Amylase) पाचन की प्रक्रिया को पहले ही शुरू कर देते हैं।
इससे पेट पर कम बोझ पड़ता है और अपच/गैस/एसिडिटी की समस्या कम होती है।
Eat Water यानी कि क्या?
पानी को इस तरह से पीना है जैसे भोजन कर रहे हैं यानी पानी को धीरे धीरे एक-एक घूँट गले से नीचे उतारना है।
कुछ लोग एक बार में पूरा एक गिलास पानी गले से नीचे उतार देते हैं, एक श्वास में ही पूरा गटक लेते हैं, यह अच्छी आदत नहीं है।
8. याद रखिए-सही नाड़ी में पीया हुआ पानी घी का काम करता है, और गलत नाड़ी में पिया हुआ पानी जहर का। यही नियम भोजन पर भी लागू होता है।
आपने Notice किया होगा-कभी 12 बजे बहुत भूख लगती है, पर अगर हम कुछ न खाएँ तो 1–1.5 घंटे बाद भूख अपने आप गायब हो जाती है। क्यों?
इसका कारण है-जब Right Nostril (सूर्य नाड़ी) चल रही होती है, तब पेट में Digestive Juices (Gastric Acid, Pepsin आदि) Release होते हैं। इसे Science में Cephalic Phase of Digestion कहते हैं। यह असर करीब 10–60 मिनट तक रहता है।
स्वरोदेय विज्ञान कहता है एक स्वस्थ इंसान की नाड़ी लगभग 48 Minutes तक एक तरफ चलती है, और दिनभर में करीब 30 बार बदलती है।
अगर कभी दोनों नाड़ियाँ एक साथ चलती हों? यानी दोनों छिद्रों से हवा आ रही हो जा रही हो तब क्या करना?
तो इसे Yellow Signal मानना है-उस समय में ना खाना है और ना ही पानी पीना है।
9. अगर तपस्वी NSS के हिसाब से चलें तो तपस्या और पारणा दोनों आसान हो जाते हैं।
सही नाड़ी (Right Nostril) में भोजन लिया तो थोड़ा ज़्यादा भी खा लिया तो Digest हो जाएगा। लेकिन गलत नाड़ी में Healthy चीज भी नुकसान कर सकती है। गलत नाड़ी में पानी भी रोग दे सकता है।
प्रश्न : वाह! ज़बरदस्त विज्ञान है तो अब रात को भी नाडी पहचानकर खा पी लेंगे तो क्या समस्या है?
बिल्कुल नहीं। उल्टी खोपड़ी वालों की बुद्धि उल्टी ही चलेगी। सूर्यास्त के बाद तो अमृत जैसा भोजन भी जहर समान है। क्योंकि Sunset के बाद जठराग्नि (Digestive Fire) बहुत मंद हो जाती है।
Modern Science भी आज कह रहा है कि Sunset के बाद भोजन से Health Problems बढ़ती हैं।
जब जब Signal Green हो तब तब भोजन/पानी की गाडी चलानी नहीं है मगर जब-जब भोजन/पानी की गाडी चलानी है तब-तब उस-उस नाडी का Signal Green होना बहुत ज़रूरी है।
उल्टा पकड़ेंगे तो 24 घंटे खाते-पीते रहेंगे। जीने के लिए खाना है, खाने के लिए नहीं जीना है।
10. अंतिम सूत्र
अगर दस्त (Loose Motions) हो तो सामान्य नियम उल्टा करना है: चंद्र नाड़ी (Left) में पानी नहीं पीना, बल्कि सूर्य नाड़ी (Right) में पानी पीना है और भोजन चंद्र नाड़ी में करना है।
अगर कब्ज (Constipation) हो तो सीधा नियम अपनाना है।
हमारे पूर्वज इस विज्ञान को Practically Apply करते थे। हमने हमारे पूर्वजों को बहुत Under Estimate किया है।
सौराष्ट्र में भोजन करते समय बाएँ घुटने के नीचे लकड़ी की एक चीज़ (ढींचणियुं) रखी जाती थी ताकि सूर्य नाड़ी चालू हो जाए और भोजन अच्छे से हज़म हो सके।
इसलिए याद रखना है कि हम भले तपस्या न कर रहे हों, लेकिन अच्छी Health के लिए भी NSS को Follow करना बहुत ज़रूरी है।
गुरु भगवंत के पास ऐसे सैंकड़ों तपस्वी आ चुके हैं जिन्होंने इस NSS को, नाडी विज्ञान को Practically Apply करके उपवास, आयम्बिल आदि तपस्या बिलकुल सरलता से की है। ऐसे अनेकों अनुभव आए हैं।
Health और तपस्या को लेकर और भी अनेकों बातें Aahar Card पुस्तक में हैं तो नीचे दिए गए Contact Information पर संपर्क कर प्राप्त कर आप पुस्तक प्राप्त कर पढ़ सकते हैं।
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आप भी इस Natural Signal System को कुछ दिनों तक Practically Follow करके Comments में अपना अनुभव ज़रूर Share कीजिएगा।
सभी तपस्वियों को, आराधकों को इस NSS के द्वारा शाता पहुंचे और सभी का तप सरलता से पसार हो यही परमपिता परमात्मा से प्रार्थना।
सभी तपस्वियों की, आराधकों की खूब खूब अनुमोदना।
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