Pujya Panyas Shri Omkarshekhar Vijayji Maharaj Saheb’s Devlokgaman | Was It Really Just An Accident?

पूरे जैन संघ को झकझोर देने वाली घटना

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28th May 2026.. जैन संघ के लिए एक भयानक दिन।

परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री अजितशेखर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के शिष्यरत्न पंन्यास जी भगवंत श्री ओंकारशेखर विजयजी महाराज साहेब का गुजरात के राजकोट के पास चोटिला नमक स्थान में ACCIDENT में देवलोकगमन हुआ।

झकझोर देनेवाली घटना

जानकारी के अनुसार, 28th May 2026 के दिन चोटिला के पास आए हुए सापर गाँव के आगे जो Highway आता है, वहां पूज्य आचार्य श्री का शिष्य परिवार अलग अलग टुकड़ियों में विहार कर रहा था।

ऐसे में पूज्य ओंकारशेखर विजयजी महाराज साहेब बीच में थे और रोड पर जो Side में White पट्टी होती है उसके बाहर ही तरफ यानी Road पर नहीं बल्कि बाहर की तरफ विहार कर रहे थे।

5.30 से 5.45 के बीच एक गाडी ने उन्हें इतनी जोर से टक्कर मारी कि वे लगभग 15 फूट दूर जाकर गिरे।

हुआ ऐसा कि जब पूज्य पंन्यास जी भगवंत विहार कर रहे थे तब कुछ महात्मा उनसे कुछ दूरी पर आगे और कुछ उनसे थोड़ी दूरी पर पीछे की तरफ विहार कर रहे थे और किसी ने भी अपनी आँखों से यह Accident होते नहीं देखा है।

लेकिन जो घटना के बाद देह की हालत देखी गई, उससे ऐसा अंदाजा आता है कि यह किसी Truck या फिर बड़ी Four Wheeler के द्वारा हुआ है।

इसलिए चिंता यही है कि आजतक किसी को भी कुछ भी पता नहीं है कि कौनसे वाहन ने हमारे महात्मा को इस तरह से टक्कर मारी है।

ना ही घटनास्थल पर कोई CCTV Camera था और टक्कर मारनेवाला मारकर वहां से तुरंत फरार हो गया।

प्रश्न यह है कि क्या सच में यह Accident था या फिर 20th May 2026 को MP के रीवा में जिस तरह से Side में चल रही दो दिगंबर आर्यिका को जानबूझकर कार ने उड़ाकर हत्या की कहीं वैसा ही उद्देश्य यहाँ तो नहीं था ना?

यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है।

पूरे समाज की क्षति

25 वर्षों से ज्यादा उनका संयम जीवन, 51 वर्ष की उनकी उम्र, उनका ज्ञान, उनका अनुभव, उनके द्वारा हो रही धर्म की प्रभावना, लोगों के जीवन में अच्छा परिवर्तन..

सोचिए उनके जाने से पूरे समाज को ही नहीं बल्कि पूरे देश को, पूरी दुनिया को कितना बड़ा नुकसान हुआ है।

उन्हें अगर खुद के लिए जीना होता तो मस्ती से कोई गाँव में या गुफा में जाकर अपनी साधना कर सकते थे लेकिन वे समाज के बीच रहकर, हम जैसे अज्ञानियों को मानवता का मार्ग बताते हैं।

अच्छे संस्कारों का सिंचन समाज में करते हैं, हजारों लाखों लोगों को व्यसनों से, छोटी-बड़ी हिंसाओं से पाप से मुक्त करते हैं, सोचिए उनके ऊपर, उनके परिवार के ऊपर कितना उपकार करते होंगे।

घर का एक पुरुष जब शराब गुटका सिगरेट आदि छोड़ता है तो उसकी ख़ुशी उसके परिवार से जाकर पूछेंगे तो ही हमें उसकी Value पता चलेगी।

महात्मा तो इस तरह से हजारों-लाखों परिवारों को कल्याण कर देते हैं। और ऐसे संत को इस तरह से जब गाड़ियों से उड़ा दिया जाता है तो यह सिर्फ चिंता का नहीं बल्कि चेतावनी का विषय है।

एक संत का इस तरह से Accident या हत्या में जाना यानी उनकी साधना के माध्यम से, उनके प्रवचनों के माध्यम से हजारों-लाखों लोगों के जीवन का सही दिशा में, अनेकों आत्माओं के कल्याण होने की संभावना ख़त्म होना है।

बढ़ता संकट

पिछले हफ्ते एक और Accident की खबर सामने आई है।

लगभग 5th या 6th June को आचार्य श्री विजयसिंहसेनसूरिजी महाराज साहेब का शिरसाद के पास Accident हुआ और उन्हें तुरंत मुंबई की एक हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। फिलहाल वे ICU में है और उनका इलाज चल रहा है।

अहमदाबाद के प्लेन क्रेश में लगभग 260 लोगों की मृत्यु हुई थी, इसका हम सभी को दुःख है और होना ही चाहिए। कितने ही दिनों तक तो Media में इस विषय पर चर्चा भी की, सरकार और प्रशासन भी Active हुआ था..

News Reports के अनुसार हमारे भारत देश में रोज़ के.. जी हाँ रोज़ के Daily लगभग 500 से भी ज्यादा लोग Road Accidents में मरते हैं।

It’s like 2 Air Crashes Everyday.

लेकिन बस यह Accidents की न्यूज़ एक छोटे से कोने में ही रह जाती है। हम रोज़ के 500 लोगों को Accidents में खो रहे हैं। हर वर्ष Average 1.5 लाख लोग Accidents में मर रहे हैं, ये Govt का ही डाटा है।

कितने ही परिवार अनाथ होते होंगे, कितने तो परिवार के परिवार ख़त्म हो जाते होंगे, कितने ही माता-पिता अपने बच्चों को अग्नि संस्कार देते होंगे.. क्या ये Data National Emergency से कम है?

सरकार को और हम सभी को जागना होगा।

मानव जीवन इतना सस्ता नहीं होना चाहिए कि गाडी आकर एक सेकंड में इस तरह से ख़त्म कर दे। कुछ शराब पीकर चलाते हैं और कुछ लोगों की रफ़्तार इतनी भयानक होती है कि जो चपेट में आया उसका उसी क्षण अंत हो जाएगा।

सरकारी तंत्र को जागना होगा और इस विषय में गहन जांच होनी चाहिए यह हमारी मांग है।

इसी के साथ Speeding वाली Vehicles, Drink and Driving वाले Cases में सख्त से सख्त Action लेना चाहिए.. सिर्फ छोटा-मोटा Fine लगाकर उन्हें जाने देना शायद इसी के कारण से आज हर रोज़ 500 लोग मर रहे हैं।

आवाज़ उठानी होगी

3rd June को हुबली में जैन समाज के 2500 लोगों ने साधु-साध्वीजी सुरक्षा Rally निकाली। सभी ने मिलकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी, सड़क परिवहन मंत्रालय Chief Ministers, State Govts और Central Govt से ठोस एवं तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

जैन संघ को भी जागना होगा।

अभी के विकट समय को देखते हुए पूज्य गुरु भगवंतों को लंबा विहार करवाना ज़रा सा भी उचित नहीं लगता है। हम हमारे क्षेत्र के आस पास में रहे हुए गुरु भगवंतों से ही चातुर्मास के लिए विनंती कर सकते हैं।

दूर दूर विचर रहे महात्माओं को जब हम विनंती करते हैं तो उन्हें लंबे-लंबे विहार करके आना पड़ता है, इसमें Accidents की संभावना बहुत ज्यादा रहती है, Please विवेक के साथ समझिएगा।

आज के समय में लंबे विहार बिलकुल भी Safe नहीं है। अगर सच में हमें महात्माओं की फ़िक्र है तो हमें विवेक पूर्वक इस दिशा में सोचना होगा।

उदाहरण के लिए, Just for Example,
कोई महात्मा अगर राजस्थान में विचर रहे हैं तो South के संघों को उन्हें विनंती करने से पहले सोचना चाहिए।

क्या South में अन्य महात्मा नहीं है? क्या हम South में रहे हुए अन्य महात्माओं को विनंती करके नहीं बुला सकते हैं, जिससे उन्हें कम से कम विहार करके आना पड़े।

मान लीजिए राजस्थान में रह रहे महात्मा को विनंती करनी ही है तो Safely विहार करवाकर South में बुलाकर फिर आगे के कुछ वर्षों के लिए उन्हें फिर से North की तरफ जाना ना पड़े, यही पर पास पास के संघों में चातुर्मास हो जाए ऐसा नहीं कर सकते हैं?

विहार वह गलत नहीं है। लेकिन इसमें कहीं ना कहीं हमारे द्वारा चूक हो रही है, विवेक की कमी लग रही है।

रोज़ के 500 लोग जब Accidents में मर रहे हो ऐसे समय में महात्माओं को लंबे विहार करवाना बिलकुल भी खतरे से खाली नहीं है।

इस वास्तविकता को, इस Reality को अगर हम Accept करेंगे और इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, कुछ सोचेंगे चिंतन मंथन करेंगे, तो वही पूज्य ओंकारशेखर विजयजी महाराज साहेब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्रेरणादायी जीवन

हमने एक उत्तम महात्मा को खो दिया है।
उनका सांसारिक नाम था – शैलेश भाई भवरलालजी

शुरू से ही उनके स्वभाव में बहुत सरलता थी, बड़ो के प्रति आदरभाव वगैरह गुण थे। ऐसा कह सकते हैं कि पूर्व भव की कोई साधना लेकर आए हो ऐसा उनका व्यक्तित्व था।

माता कमला देवी का जीवन धर्ममय था, वे तपस्या आराधना वगैरह बहुत भाव से करते थे और पिता भवरलालजी का सादगीपूर्ण एवं सरल जीवन था। पुत्र शैलेश को जीवन में दोनों माता एवं पिता के गुणों की प्राप्ति हुई इसलिए शैलेश भाई के जीवन में धर्म भी आया और सरलता भी आई।

संसारी अवस्था में मलाड में उनकी Schooling हुई और फिर वे कॉलेज के बाद शेयरबाज़ार में व्यस्त हो जाते थे। पूज्य पंन्यास जी भगवंत श्री चंद्रशेखर विजयजी महाराज साहेब के सिर्फ एक व्याख्यान को सुना और शेयरबाज़ार को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ दिया और गुरु भगवंतों के साथ सत्संग करने लगे।

Year 2000 में पंन्यास जी भगवंत श्री ओंकारशेखर विजयजी महाराज साहेब की दीक्षा हुई।

ऐसे तो इनके जीवन में अनेकों गुण थे लेकिन कोई पूछे कि कोई 3 विशेष गुण क्या होंगे तो कह सकते हैं कि

  • A. छोटी उम्र वाले साधु भगवंतों के प्रति अद्भुत स्नेहभाव और सहायक भाव
  • B. परोपकार की ज़बरदस्त भावना
  • C. जीवों के प्रति अत्यंत प्रेम भावना और जयणा

सामान्यतौर पर Office में बेटा जब कदम रखता है तो शुरू शुरू में तो पिता से पूछ पूछकर ही सब काम करता है लेकिन एक दो वर्ष में ही बेटे की थोड़ी थोड़ी Tone Change होने लगती है कि पापा ये चीज़ आपको पता नहीं चलेगी मुझे मेरे हिसाब से करने दीजिए।

अब पंन्यास जी भगवंत का दीक्षा पर्याय 26 वर्ष का लेकिन इन 26 वर्षों में जब भी कभी भी किसी ने भी इनसे कहा हो कि ‘साहेबजी ऐसा कीजिए, वैसा कीजिए, यह कीजिए, वह कीजिए ना’ तो उनका एक ही जवाब रहता था कि “आप गुरु महाराज को पूछिए क्योंकि जो गुरु महाराज कहेंगे वही मैं करूँगा..”

इस Level का इनका गुरु समर्पण था।

दीक्षा के बाद भले महात्मा सब कुछ त्याग कर निकल जाते हैं लेकिन फिर भी उनके सांसारिक परिवारजनों का उन पर स्नेह तो रहता ही है यह स्वाभाविक है।

पंन्यास जी भगवंत के सांसारिक रिश्तेदार जब भी उनके पास पर्युषण के दिनों में या कभी भी जाते थे तो उनकी तरफ से 2 ही उपदेश विशेष रूप से दिए जाते थे कि अपने जीवन में आराधना बढ़ाओं और पाप कम करो, बाकी कोई बात नहीं।

कोई भी महात्मा की तबियत बिगडती या मान लीजिए कोई कारण से Vomit वगैरह हो जाती तो अपना सब काम साइड में रखकर उन्हें संभालने के लिए सबसे पहले पूज्य ओंकारशेखर विजयजी महाराज साहेब हाज़िर हो जाते थे।

पूज्य पंन्यास जी भगवंत ने शास्त्रों की पढ़ाई के बाद अपने गुरु की यानी पूज्य आचार्य श्री अजितशेखर सूरीश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञा से स्वतंत्र 14 चौमासे अलग क्षेत्र में किए।

लेकिन कभी उन्होंने अपने गुरु महाराज से ऐसा नहीं कहा कि मुझे इस क्षेत्र में चौमासा करने की इच्छा है, कभी नहीं। आचार्य श्री जो क्षेत्र का निर्देश देते थे, उस क्षेत्र में सहज रूप से स्वीकार कर वहां पर चातुर्मास के लिए निश्रा प्रदान करते थे।

ऐसा उनका गुरु समर्पण था।

हमारी विनती

पूज्य पंन्यास जी भगवंत का इस तरह से देवलोकगमन होगा यह तो किसी ने भी नहीं सोचा था लेकिन अंतिम समय में उनके हाथ जाप वाली मुद्रा में थे जिससे यह कह सकते हैं कि ऐसे भयानक समय में भी वे पूरी तरह से जागृत थे और समाधि पूर्वक उनका देवलोकगमन हुआ है।

ऐसे उत्तम महात्मा का जाना यह सिर्फ जैन समाज नहीं बल्कि पूरे देश पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।

हम केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि हो रहे Accidents की Strict जांच हो और कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।

जिस भूमि पर साधु संतों की इस तरह से हत्या होती हो, Accidents होते हो वह भूमि पर लोग शांति से जी पाएंगे ऐसा सोचना मूर्खता होगी।

यह सिर्फ हत्या या Accident नहीं बल्कि आने वाले कल के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है।

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