प्रस्तुत है U-Turn Series का Episode 07
भाविन भाई चेन्नई के 1BHK Flat में Shift हुए और नौकरी करने लगे। इतना हमने अभी तक Episode 06 में देखा। इनकी पूरी Life Story आप U-Turn पुस्तक प्राप्त कर पढ़ सकते हैं।
आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत
शैतान से शैतान व्यक्ति भी अगर सही संगत में आ जाए तो भगवान बन सकता है। भाविन भाई अपने जीवन में गलत तरीके से पैसे कमाना चाहते थे, कई Shortcuts अपनाए लेकिन कोई फायदा हुआ नहीं।
इस हताशा में व्यक्ति खुश होने क लिए भी कोई ना कोई Shortcut ढूंढता है। भाविन भाई ने उस दौरान गंदे Videos देखने शुरू कर दिए थे, Yes.. He was addicted to watching Adult Content..
इसके बाद जब सही रास्ते पर आए तो उन्हें बहुत Guilt हुआ कि ‘ये मैंने क्या कर दिया। दूसरों की माँ बहन बेटी को मैंने इस तरह से देखा। ये सब पाप उदय में आएंगे तो मेरा क्या होगा।’
फिर बीच में वो एक बार सूरत गए थे। वहां पर उन्होंने सरस्वती लब्ध प्रसाद, पद्मभूषन से सम्मानित परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय रत्नसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के दर्शन किए। उनके मुख से भाविन भाई ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का अभिग्रह लिया।
2200 आयंबिल
अब भाविन भाई की भावना थी कि ‘मुझे सभी के पैसे चुकाने हैं’ लेकिन चुकाना संभव नहीं था क्योंकि पास में धन नहीं था और रकम भी छोटी नहीं थी ब्याज साइड में रखे और सिर्फ मूल रकम भी देखने जाए तो छोटे बड़े कुल 100 से भी ज्यादा लोगों से पैसे लिए थे और Total Amount लगभग एक करोड़ तक का था।
भाविन भाई अब दीक्षा लेना चाहते थे और माता पिता से जब पूछा गया कि ये दीक्षा ले ले तो आपको समस्या नहीं होगी? तो माता-पिता ने Clearly कह दिया कि ‘हमारा तो जो होना होगा सो होगा। लेकिन इसकी दीक्षा में हम कभी भी ना नहीं कहेंगे।’
पूज्य गुणहंस विजयजी महाराज साहेब ने कहा कि ‘अभी लगभग एक करोड़ का कर्ज है और शास्त्रों में मना किया है कि कर्ज हो तब तक दीक्षा नहीं देनी चाहिए। नहीं तो जैन धर्म की निंदा होती है।
लोग बोलेंगे कि हमारा पैसा खा गया और अब पैसे वापस देने ना पड़े इसलिए साधु बनकर बैठ गया। लोग बोलेंगे ये साधु लोग भी ज़ोरदार है। अपने चेले बनाने की लालच में ऐसे कर्ज में डूबे व्यक्ति को भी दीक्षा दे देते हैं। अब तो हमें पैसे मिलने से रहे।
इस तरह की बातें होती है इसलिए पैसे चुकाए बिना तो दीक्षा नहीं हो सकती।’ अब इसका कोई Practical Solution नहीं था उनके पास कर्ज चुका सके इतना धन नहीं था और इधर गुरु भगवंत के पास एक आत्मा की दीक्षा के कोई एक करोड़ का कर्ज चुका दे ऐसा कोई भक्त भी नहीं था।
इसलिए दीक्षा की बात फिलहाल अटक गई।
इसके बाद वर्ष 2024 में चेन्नई की धरती पर Sowcarpet आराधनाभवन में पधारे तार्किकशिरोमणि, श्रमणी गणनायक आचार्य भगवंत श्रीमद विजय अभयशेखर सूरीश्वरजी महाराज साहेब।
आचार्य श्री के दो शिष्य महात्माओं का 100 ओली का पारणा था। उस पारणे के लाभ के लिए उन्होंने आयम्बिल में ही चढ़ावा बुलवाया। जो जितने ज्यादा आयम्बिल करेगा उसे पारणे का लाभ मिलेगा। भाविन भाई ने यह चढ़ाव लेने का निर्णय किया और अंत में 2200 आयम्बिल का चढ़ावा लेकर यह लाभ लिया।
नियम ऐसा था कि जितना आयम्बिल हो उससे दुगुने दिनों में उतने आयम्बिल करने। तो 2200 आयम्बिल यानी 4400 दिनों में करने। भाविन भाई ने ओली का पाया भी भर दिया और 17-18 ओली उनकी हो भी गई थी।
American दिक्षार्थी ऋषि भाई
इस तरफ पूज्य गुणहंस विजयजी महाराज साहेब की निश्रा में कुलपाकजी तीर्थ में उपधान चल रहे थे और खेतवाडी मुंबई में एक प्रभावशाली साध्वीजी भगवंत श्री परमरेखाश्रीजी महाराज साहेब ने इसी पुस्तक पर प्रवचन दिए थे।
तो वहां से दो श्रावक भाई कुलपाकजी आए और अपनी भावना व्यक्त की कि ‘अगर भाविन भाई दीक्षा लेते हैं तो हम उनका कर्ज उतारने की मेहनत करना चाहते हैं’ लेकिन रकम कितनी वह उनको पता नहीं था।
उनकी इच्छा तो बहुत थी लेकिन जब उन्हें पता चला कि रकम एक करोड़ के आस पास की है तो वे विचार में पड़ गए और काम अटक गया।
समय बीता और पूज्य आचार्य श्री अभयशेखर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के साथ ही पूज्य गुणहंस विजयजी महाराज साहेब एवं उनके शिष्य महात्माओं का चातुर्मास निश्चित हुआ तो पूज्य गुणहंस विजयजी महाराज साहेब बैंगलोर पहुंचे।
वहां पर आचार्य श्री की निश्रा में श्री सुशीलधाम जैन तीर्थ में उपधान होने वाला था।
वहां पर पूज्य देवर्षिरत्न विजयजी महाराज साहेब द्वारा एक संदेश आया कि ‘एक भाग्यशाली भाविन भाई की दीक्षा के लिए 45 लाख रुपये देने के लिए तैयार है। इस रकम में अगर उनका कर्ज उतर जाए तो वे दीक्षा ले सकते हैं।’ इस खबर का बहुत आनंद हुआ।
हमें जानकर आश्चर्य होगा जैन मीडिया पर हमने American Diksharthi Rishi Bhai का Podcast लिया था। ज़रूर आपने वो पूरा Interview देखा होगा जो एक करोड़ की सैलरी छोड़कर दीक्षा ले रहे थे।
उनकी दीक्षा के साथ साथ उनकी माता सुनीता जी की भी दीक्षा निश्चित हो गई थी। अब उनके पास जो बाकी बचे पैसे थे, उनको अच्छे मार्ग में उसका उपयोग करना था। साधर्मिक भक्ति का Option सामने था। एक युवक कर्ज से मुक्त होकर दीक्षा ले ले, इससे अच्छा और क्या हो सकता था।
कर्ज का भुगतान
अब अभी पूरी Problem Solve नहीं हुई थी। क्योंकि 100 से भी ज्यादा लोगों के पैसे चुकाने थे। 1 करोड़ की रकम थी और 50 लाख में Settlement करना था। अगर एक व्यक्ति भी इस तरह के Settlement में माने नहीं तो दीक्षा अटक जाएगी।
अब एक ही व्यक्ति का कर्ज होता तो एक को ही समझाना पड़ता। यहाँ पर तो 100 से भी ज्यादा लोग थे, उसमें भी छोटे छोटे 10-20-30 हज़ार वाले भी थे। वो अब 50% में माने ऐसे Chances कितने?
यह सब Settlement करें कौन? क्योंकि खुद भाविन भाई जाए तो जिंदा भी लौटेंगे या नहीं यह एक प्रश्न था। यह काम हाथ में लिया अहमदाबाद के श्रावक कुलदीपभाई ने।
18th May 2025 के दिन वो Specially इस काम के लिए बैंगलोर आए। उन्होंने कहा कि ‘एक महीने में सब Settle कर देंगे, इससे पहले मैं घर नहीं जाऊँगा, आप दीक्षा की तैयारी कीजिए साहेबजी।’
ऋषि भाई और उनकी माता सुनीताजी की दीक्षा 8th June 2025 को मुंबई शाहपुर के पास मानसमंदिर तीर्थ में निश्चित हो चुकी थी। कुलदीप भाई एक एक करके जिनके पैसे बाकी थे उन सभी के पास जाने लगे। 4-5 दिनों में आधे से ज्यादा लोग Settlement के लिए मान गए थे।
फिर दक्षिण भारत में जिनके पैसे बाकी थे उनके पास गए और कहा कि ‘भाविन भाई दीक्षा लेना चाहते हैं।’ पहले तो कईयों ने गुस्सा व्यक्त किया, अपशब्द भी बोले लेकिन फिर पता चला कि 50% धनराशि वापस मिल रही है तो सब खुश हो गए।
कुलदीप भाई ने प्रेम से उन्हें सब Situation बताई और समझाया। सब बहुत खुश हुए और Settlement में मान गए। उन्होंने पैसे लिए और कर्ज चुकता होने के हस्ताक्षर करके दिए। उल्टा फिर तो कुलदीप भाई को नाश्ता भोजन करने को कहने लगे।
पैसे की ताकत ज़बरदस्त है।
अब डोंबिवली के कुछ लोग थे जिनके पैसे बाकी थे, कुलदीप भाई वहां पहुंचे। एक भाई ने कहा कि ‘उस बात को तो लगभग कई साल बीत गए हैं, मैं तो समझ चुका था कि वो पैसे कभी वापस नहीं आएंगे। लेकिन इतने साल के बाद भी आप आए तो बहुत अच्छा लगा।’
उन्होंने भी Settlement के लिए स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि ‘मेरे घर पर बेटे की शादी है, मुझे इससे बहुत Support मिलेगा।’
संयम की तैयारी
इधर दूसरी तरफ बैंगलोर में सुशीलधाम में उपधान चल रहे थे। उस उपधान में भाविन भाई के माता-पिता भी जुड़ गए। उधर कुलदीप का संदेश आया कि आप दीक्षा का मुहूर्त लेने जा सकते हैं लगभग काम हो चुका है और सब बहुत खुश और संतुष्ट है।
चेन्नई के श्रावक विक्रम भाई 25th May 2025 के दिन भाविन भाई को लेकर मुंबई पहुंचे। वहां पर दीक्षा की जय बोली गई यानी दीक्षा का मुहूर्त मिला। दीक्षा 8th June 2025 को मानसमंदिर तीर्थ में ऋषि भाई और उनकी माता के साथ ही होगी ऐसी घोषणा हुई।
दीक्षा के मुहूर्त लेने में भाविन भाई के माता-पिता उनके साथ नहीं थे क्योंकि वे उपधान में थे। बस 14 दिनों में तो भाविन भाई के हाथों में रजोहरण आना था। वेश परिवर्तन होना था और दुनिया की नज़र में दो साल पहले का पापी यही भाविन भाई अब बननेवाले थे…
विश्व एवं देवों को भी वंदनीय ऐसे पंचमहाव्रत धारी साधु..
30th May को भाविन भाई पहुंचे अपने माता-पिता की मोक्षमाला के लिए बैंगलोर पहुंचे। अद्भुत माहौल था। पूज्य गुणहंसविजयजी महाराज साहेब ने भाविन भाई को कहा कि इतना बड़ा परिवर्तन हुआ है तो दीक्षा से पहले ही 108 मज़बूत नियम लेना, उससे सुंदर संयम जीवन आगे बढेगा।
आखिरकार वह स्वर्णिम दिन आया।
भाविन भाई की दीक्षा
8th June 2025 यानी इतिहास को हमेशा हमेशा के लिए बदल देनेवाला दिन। कल तक जिसे दुनिया गाली दे रही थी उसे ही अब पूरी दुनिया हाथजोड़कर मस्तक झुकाकर वंदन करनेवाली थी।
American Diksharthi ऋषि भाई एवं उनकी माता सुनीताजी के साथ साथ जीवन का सबसे बड़ा U-Turn लेनेवाले भाविन भाई की भी दीक्षा हुई।
संघ शासन कौशल्याधार परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब, पूज्य आचार्य श्री गुणरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब के शिष्यरत्न, परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय यशोरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब एवं पूज्य जयसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के शिष्यरत्न :
परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय प्रेमसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के हाथों से उन्हें रजोहरण प्राप्त हुआ और ऋषि भाई हुए पूज्य मुनिराज श्री ऋषिहेम विजयजी महाराज साहेब एवं भाविन भाई हुए पूज्य मुनिराज श्री यशोहेम विजयजी महाराज साहेब।
सुनीता बहन हुए पूज्य साध्वीजी भगवंत श्री मनातीत रेखा श्रीजी महाराज साहेब।
परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री विरागरत्नविजयजी महाराज साहेब के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री युगरत्न विजयजी महाराज साहेब के शिष्य के रूप में भाविन भाई यानी पूज्य यशोहेम विजयजी महाराज साहेब अब अद्भुत संयम का पालन कर रहे हैं।
यहाँ पर U-Turn Series पूरी होती है।
अगर आपको ऐसी जिज्ञासा हो कि 50% चुकाकर कोई कैसे दीक्षा ले सकता है?
क्या यह उचित है?
पूरे पैसे चुका देते। ऐसे क्यों किया?
इस तरह से पैसे चुकाकर किसी की दीक्षा हो क्या वह उचित है?
इन जिज्ञासाओं का समाधान U-Turn पुस्तक में दिया गया है, आप प्राप्त करके पढ़ सकते हैं।
Moral Of The Story
1. पैसा कभी Shortcut से आता नहीं, और आए तो भी टिकता नहीं।
2. लोगों की बद्दुआ लेने वाला कभी शांति से जी नहीं सकता।
3. छोटे छोटे पाप कब बड़े बन जाते हैं पता नहीं चलता इसलिए उन्हें वहीँ पर रोक देने चाहिए।
4. सट्टेबाजी करनेवाला खुद तो डूबता है, परिवार को भी साथ में लेकर डूबता है।
5. माता-पिता का बच्चों पर प्रेम के साथ साथ Strict रहना भी बहुत आवश्यक लगता है।
6. Problems से बचने के लिए जीवन का अंत नहीं करना होता, धर्म की शरण स्वीकारनी होती है।
7. अनावश्यक खर्चे कम करके साधर्मिक भक्ति करना यह समय की मांग लगती है।
8. आयम्बिल अद्भुत मंगल है, सच्चे भाव से करने जाए तो चमत्कार देखने को मिलते हैं।
9. किसी को भी Judge नहीं करना चाहिए, आज का शैतान कल का भगवान बन सकता है।
10. जीवन में किसी का भी कभी भी U-Turn आ सकता है।
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