From Curse To Divinity: The Untold Story Of Gometh Yaksha | Girnar History – Episode 05

गिरनार भक्ति ने कैसे एक पापी को देव बना दिया?

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By Jain Media 6 Min Read

गोमेध यक्ष की आँखें खोल देनेवाली कथा

प्रभु और तीर्थ भक्ति से कैसे गोमेध नामक व्यक्ति अधिष्ठायक देव बनता है? वह आज हम जानेंगे।

प्रस्तुत है Girnar History का Episode 05. बने रहिए इस Article के अंत तक। 

कर्मसत्ता ने दी सजा 

भरत क्षेत्र की पवित्र भूमि पर एक सुंदर गाँव था-सुग्राम। उस गाँव में एक व्यक्ति रहता था जो अलग अलग क्रिया कांड कराने में Expert था। उसका नाम गोमेध पड़ गया। मिथ्यात्व के अंधकार में होने के कारण वह धर्म को समझ नहीं पाया। 

Please Note : मिथ्यात्व यानी सही को गलत मानना और गलत को सही मानना। 

गोमेध धर्म के नाम पर अनेक जीवों की हत्या करवाता था। इन पापकर्मों के कारण उसे तुरंत ही फल मिला जिससे उसकी पत्नी और पुत्रों की मृत्यु हो गई। गोमेध अकेला और बेसहारा हो गया और गहरे दुःख में रहने लगा। 

कर्मसत्ता ने इतने में उसे नहीं छोड़े, उसके कर्मों का पूरा हिसाब करते हुए उसे एक और भयानक सजा दी। कुछ समय बाद गोमेध को भयंकर कुष्ठरोग यानी Leprosy की बिमारी हो गई। उसके रिश्तेदारों ने भी उसे छोड़ दिया और उसके प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई। 

उसके शरीर में तकलीफ इतनी बढ़ गई कि उसके शरीर में असंख्य कीड़े पैदा हो गए। हर अंग से रस्सी यानि पस बहता था और उससे भयानक दुर्गंध आती थी। हर समय उसके शरीर पर मक्खियाँ भिनभिनाती थीं और वह तड़पता रहता था। 

उसके शरीर में अंगारे भर दिए हों, ऐसी जलन उसे हर पल होती थी। इन सभी के कारण उसे दर्द और इतनी पीड़ा होती थी कि ‘मुझे जल्द से जल्द मौत आ जाए’ ऐसा वह सोचने लगा था। 

साधु भगवंत के वचन 

लेकिन पूर्व में किए हुए अच्छे पुण्य कर्म कभी ना कभी तो फल देते ही हैं और ऐसा ही कुछ गोमेध के साथ हुआ। 

एक बार गोमेध दुख और दर्द के कारण चीखते हुए रास्ते पर चल रहा था। उस समय एक तपस्वी साधु भगवंत भी उस रास्ते से गुजर रहे थे। वे साधु भगवंत करुणा के भंडार थे। 

उन्होंने गोमेध की बुरी हालत देखी और दया भाव के साथ उसे कहा ‘हे भाग्यशाली। तूने धर्म के नाम से जीवों की हत्या की है, ये तो केवल उस पाप के Starting का फल है। यह तो नरक आदि भयानक वेदना का प्रथम चरण है यानी पहला Step है। 

अगर तू इस पीड़ा से थक गया है और अगले जन्म में इससे बचना चाहता है, तो अभी भी मौका है। तू जीवदया जिसके मूल में है, ऐसे जीवदया पालक, करुणासागर, दया के भंडार श्री जिनेश्वर परमात्मा द्वारा बताए गए जिनधर्म को स्वीकार कर। 

आज तक तूने जिन अनेक जीवों की हत्या की है, जिन जीवों को भयानक दुःख दिया है उनसे क्षमायाचना कर यानी माफ़ी मांग। 

तेरे द्वारा किए गए भयानक पापों को ख़त्म करने की ताकत रखनेवाले, अनेक देवों द्वारा पूजित अनंत तीर्थंकरों के अनंत कल्याणकों की भूमि ऐसी श्री गिरनारजी महातीर्थ की सेवा और भक्ति कर जिसके प्रभाव से तेरे सभी पाप कर्म नष्ट हो सकते हैं।’

मुनिराज के वचन सुनकर गोमेध का Complete Transformation हो गया। 

अधिष्ठायक गोमेध देव

उसने जिनधर्म को स्वीकार किया, जिनशासन को अपनी रगों में बसाया और श्री गिरनारजी तीर्थ को अपने दिल में बसाया। श्री नेमिनाथ प्रभु का नाम स्मरण करते हुए समाधी भाव, समता और शांति में डूबकर उसने बिना किसी पीड़ा या दुःख के मृत्यु को प्राप्त किया। 

लेकिन यह गोमेध का अंत नहीं था…  

सच्चे दिल से उसके द्वारा पीड़ित जीवों से क्षमा मांगने से, सच्चे भाव से जिनधर्म को अपनाने से और सच्चे मन से प्रभु का नाम स्मरण करने से गोमेध के पाप कर्म नष्ट हुए और अगले जन्म में वह एक दिव्य, तेजस्वी और अत्यंत ऋद्धि वाला गोमेध देव बना और उसे दिव्य दृष्टियाँ भी प्राप्त हुई। 

Please Note : दिव्य दृष्टी यानी एक तरह की Divine Sense

गोमेध देव के तीन मुँह और छह हाथ थे। उनके बाएँ हाथों में शक्ति, शूल और नकुल थे और दाएँ हाथों में चक्र, परशु और बीजोरा थे। उनका वाहन एक पुरुष था। 

अब गोमेध देव शासन अधिष्ठायिका श्री अंबिका देवी की तरह ही देवों द्वारा बनाए गए एक दिव्य विमान में बैठकर आसोज वदि अमावस यानी श्री नेमिनाथ प्रभु के केवलज्ञान कल्याणक के दिन श्री गिरनारजी तीर्थ के सहसवान नामक वन में पहुंचे। 

वहां पर देवों द्वारा समवसरण की रचना की गई थी। गोमेध देव ने श्री नेमिनाथ प्रभु को वंदन किया और अपना पूर्व भव याद किया। 

कैसे एक मुनि भगवंत के वचन ने, श्री नेमिनाथ प्रभु के नाम स्मरण ने और श्री गिरनारजी तीर्थ की भक्ति ने उनका जीवन बदल दिया था। 

अत्यंत भावों के साथ गोमेध देव ने प्रभु की स्तुति की और गोमेध देव के इतने शुद्ध और श्रद्धा से भरे हुए भावों को देखते हुए इंद्र महाराजा ने प्रसन्न होकर गोमेध देव को श्री नेमिनाथ प्रभु के शासन का अधिष्ठायक देव के पद पर स्थापित किया। 

तो इस तरह श्री नेमिनाथ प्रभु के शासन के अधिष्ठायक देव की स्थापना हुई। 

अगले Episode में हम जानेंगे गिरनार के The Famous गजपद कुंड का Importance बताती हुई एक अद्भुत कथा। 

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