Why Did Prabhu Mahaveer Choose Endurance Despite Having Infinite Power? Updeshmala Granth Ep 03

शक्ति होने पर भी प्रभु ने कष्टों को सहन क्यों किया?

Jain Media
By Jain Media 54 Views 7 Min Read

प्रस्तुत है आगम ज्ञानी बनो Series के अंतर्गत उपदेशमाला ग्रंथ का Episode 03

जइ ता तिलोगनाहो,
विसहडइ बहुआइं असरिसजणस्स।
इअ जीयंतकराइं,
एस खमा सव्वसाहूणं।। (03) Updeshmala Granth

अगर तीनलोक के नाथ परमात्मा महावीर स्वामी, नीच लोगो ने किए हुए जीवननाश करनेवाले बहुत प्रकार के उपसर्गों को सहन करते हैं, तो सभी साधुओं को भी यह क्षमा रखनी चाहिए। 

यह 3rd गाथा का Short में अर्थ है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

1. प्रभु महावीर ने त्रिपुष्ट वासुदेव आदि के भवों में भयानक पाप किए थे, वो सभी पाप कर्म प्रभु ने सातवीं नरक आदि भवों में भटक भटककर भुगते और 25वें भव में घोर साधना के द्वारा बहुत सारे कर्मों का नाश भी किया। 

2. लेकिन यह सब करने के बाद भी कुछ कर्म बाकी रह गए थे, वह कर्म लगभग निकाचित थे इसलिए साधना से वह कर्म खत्म होनेवाले नहीं थे। 

वह कर्म तो घोर दुःख भुगतकर ही खत्म कर सकते हैं। 

3. उन कर्मों के उदय से प्रभु को देवों ने, मनुष्यों ने और पशुओं ने घोर दुख दिए। उसमें संगम देव, शूलपाणी-यक्ष, व्यंतरी यह सब देव देवियों ने दुःख दिया। 

कान में कीले मारनेवाला ग्वाला, अनार्य देश के जंगली लोग यह सब मनुष्यों ने दुख दिया। चंडकौशिक नाग, मधु मक्खियाँ भंवरें यह सब पशुओं ने दुख दिया। 

4. यह सब देव वगैरह नीच कक्षा के थे इसलिए खराब से खराब दुख देने में वह लोगों ने कोई भी कमी नहीं रखी इसलिए वह दुख अत्यंत भारी थे। 

5. वह दुख ऐसे थे कि जीवन का नाश कर डाले। अगर प्रभु का आयुष्य निकाचित नहीं होता तो ‘प्रभु मर ही जाए’ इतने भयानक उपसर्ग थे। 

6. प्रभु वीर ने वह सभी उपसर्गों को प्रसन्नता से सहन किया। 

7. तो सभी साधुओं को भी ऐसी क्षमा रखनी चाहिए ऐसा यह गाथा में बताया गया है। 

8. हमारा अनुभव है कि कान में डाली हुई सली अगर जरा सी भी ज्यादा अंदर Touch हो जाए तो भयानक पीड़ा होती है। 

तो प्रभु को तो दोनों कान में लकड़ी से बने हुए खिले इतने अंदर तक डाले थे कि दोनों खिले सर के अंदर तक एक-दूसरे को Touch हो गए थे। प्रभु को कितनी भयानक पीड़ा हुई होगी यह हम कल्पना भी नहीं कर सकते। 

इस प्रकार संगम आदि देवों ने दिए हुए दुख हम सुने तो हमारे रोम रोम में कंपन शुरू हो जाए। 

9. क्या प्रभु ने मजबूरी से यह सब सहन किया? या समझदारी से? क्या प्रभु के पास यह सब देव वगैरह को रोकने की, मारने की ताकत नहीं थी? बचपन में प्रभु ने हाथों से सांप को उठाकर फेंक था ना? 

ताड़ के पेड़ की तरह विराट बने हुए भयंकर रूपवाले देव के सर पर एक मुट्ठी मारकर उसको बकरी जैसा बना दिया था ना? 

तो प्रभु चाहते तो चंडकौशिक को उठाकर फेंक सकते थे, चाहते तो संगम को भी मुट्ठी मारकर बकरी बना सकते थे, चाहते तो कीले मारनेवाले ग्वाले को एक ही मुक्का मारकर यमलोक पहुंचा सकते थे। 

शास्त्रों में लिखा है कि ‘बलं जगद्विध्वंसनक्षमं’ यानी प्रभु का बल दुनिया के हर एक जीव-जड़ को खत्म करने का था लेकिन प्रभु ने क्यों उन लोगों को रोका नहीं? मारा नहीं? 

एक ही कारण कि 

अभी मैं इन लोगों को रोकूंगा-भगाऊंगा तो मेरे वह पाप कर्म बाकी रह जाएंगे और मुझे अभी नहीं तो बाद में उसका हिसाब तो चुकाना ही पड़ेगा। तो अभी ही चुका देना बेहतर है।

प्रभु ने सहन करके कर्मों की देनदारी चुका दी तो प्रभु मोक्ष पा सके। 

10. हम संसार में भी देखते हैं कि समझदार इंसान जल्द से जल्द अपनी देनदारी चुकाकर मुक्त होना चाहेगा। प्रभु तो सबसे बड़े समझदार थे तो वह भला क्यों गलती करेंगे?

11. साधुओं के साथ-साथ सभी सांसारियों को यहाँ पर उपदेश दिया गया है कि कोई भी अगर हमें दुख दे, हमारे साथ Business में गोलमाल करें या समाज में हमारी बदनामी करें..

हमको गालियां दे या हमारे ऊपर सच्चे झूठे आरोप लगाए या Job में से हमको निकालकर-निकलवाकर बेकार बना दे या हमको परेशान करें, इन सभी चीजों में एक ही बात समझनी है कि 

मेरी देनदारी चुकाने का अवसर मिला है तो मैं चुपचाप सहन करके चुका रहा हूं। 

प्रश्न उठ सकता है कि साधु सहन करें वह तो समझ में आता है लेकिन संसारी को सहन करना पड़े यह थोडा मुश्किल लगता है। 

अभी हाल ही में जानने को मिला था कि प्रसिद्ध Singer और नेमरस गीत के रचनाकार + गायक पारस भाई गडा, उनकी.. कोई कारणवष कुछ लोगों ने निंदा-टीका की थी। 

तो पारस भाई ने अपने गुरु भगवंत से हंसते-हंसते कहा कि ‘साहेबजी मेरे कल्याण मित्र बहुत बढ़ गए हैं। वे मेरी मोक्ष मार्ग की साधना में बहुत Support कर रहे हैं।’ 

इस तरह अनेकों घटनाएं हमें देखने को मिल जाएगी जहाँ छोटे बड़े कष्ट संसारी भी सहन करते हैं। बोलना बहुत आसान है लेकिन सहन करना बहुत बहुत मुश्किल। 

सहन करने से क्या होता है, सहन किस तरह करना, महापुरुषों ने किस तरह किया है यह जानना हो तो Jailer और Friend or Foe Series देख सकते हैं। Depth में यह Concept Clear हो जाएगा।

Watch Jailer Series Here 👇

Watch Friend or Foe? Series Here 👇

Inshort दुश्मन मित्र लगे, निंदक प्रशंसक लगे, पत्थर मारनेवाले स्वर्ण मुद्रा देनेवाले लगे, दुख देनेवाले सुख देनेवाले लगे, थप्पड़ मारनेवाले प्यार करनेवाले लगे, यह सब क्षमा है। 

मोक्ष में जाने का सीधा रास्ता है। इस रास्ते पर प्रभु चले, हम भी चलने का प्रयास कर सकते हैं। 

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *