कर्मों का बंधन कैसे होता है?
प्रस्तुत है आगम ज्ञानी बनो Series के अंतर्गत उपदेशमाला ग्रंथ का Episode 16.
पिछले Episode में क्रिया धर्म से ज्यादा Importance भाव धर्म को दिया, भाव धर्म को ही मुख्य बताया, उसका कारण यह है कि भाव ही कर्मबंध का कारण है।
अगर शुभभाव है तो शुभ कर्म का बंध होता है, अगर भाव अशुभ है तो अशुभ कर्मों का बंध होता है। क्रिया के आधार पर शुभ या अशुभ कर्म का बंध नहीं है।
यह बात 23rd गाथा में बता रहे हैं। जं जं समयं जीवो,
आविसड़ जेण जेण भावेण।
सो तम्मि तम्मि समए,
सुहासुहं बंधए कम्मं।। (23)Updeshmala Granth
जीव जो जो समय पर जो जो भाव को धारण करता है, उस उस समय पर शुभ या अशुभ कर्म को बांधता है। यह गाथा का अर्थ है।
अब विस्तार से देखते हैं…
दुनिया में Business दो तरीकों से होता है :
- 1. उधार (Credit)
- 2. रोकड़ा (Cash)
आज Goods या Services दिए लेकिन उसका Amount Customer 2-5-10-15 दिन के बाद देगा, वह उधार-Credit Business है लेकिन अगर वह तुरंत Amount दे तो उसे रोकड़ा-Cash Business कहते हैं।
जिनशासन में दोनों प्रकार का Business चलता है।
कुदरत की व्यवस्था ही ऐसी है।
1. शुभभाव+शुभकर्म+सुख-यह जो Process है, उसमें अगर शुभभाव और शुभकर्म के लिए सोचें, तो यहां रोकड़ा व्यापार है।
हमारे व्यवहार की भाषा में बोले तो मान लो कि 12 बजकर 12 मिनट और 12 सेकंड पर शुभभाव था तो उसी सेकंड पर शुभकर्मों का बंध हो जाता है, 13वीं सेकंड पर भी नहीं तो आगे के Seconds की बात ही नहीं है।
तो यह रोकड़ा-Cash व्यापार है। लेकिन जो सुख मिलता है उस Angle से देखें तो उधार व्यापार है Credit Business.
शुभभाव+शुभकर्म 12वीं सेकंड पर है लेकिन उससे मिलनेवाला सुख 12वीं सेकंड पर नहीं है। वह थोड़े Time के बाद, एक दिन के बाद, 1 महीने के बाद, एक साल के बाद, एक जन्म के बाद या हजारों-लाखों जन्मों के बाद भी मिल सकता है।
2. अशुभभाव+अशुभकर्म+दुख-यह जो Process है, उसमें पूर्व जिस प्रकार बताया है, उसी प्रकार समझ लेना है।
अशुभभाव जिस समय पर होता है, उसी समय पर अशुभकर्म का बंध होता है, यह रोकड़ा व्यापार है Cash Business. लेकिन अशुभभाव + अशुभकर्म जिस समय पर है, उसी समय पर दुख नहीं आता, उसके बाद आता है यह हुआ Credit Business.
For Example,
→ संगम ग्वाले ने साधु को दान दिया तो शुभकर्म उसी समय पर आ गया और उसका फल अगले भव में आया। वह शलीभद्र बना।
→ हर एक तीर्थंकर 3rd Last भव में सभी जीवों को शासनरसी बनाने का शुभभाव रखते हैं और उसी वक्त पर ‘जिननाम कर्म’ यानी विशिष्ट शुभ कर्म का बंध हो जाता है। लेकिन उसका फल Last भव में आता है और वे तीर्थंकर बनते हैं।
यह शुभभाव+शुभकर्म+सुख की Process का उदाहरण था। ऐसे तो हजारों दृष्टांत जिनागमों में मिलते हैं।
अब अशुभभाव+अशुभकर्म+दुख की Process के उदाहरण जानते हैं।
→ प्रभु महावीर ने 18वें भव में शैय्यापालक के कान में गर्म सीसे का रस डालने का काम किया।
उस वक्त तीव्र अशुभभाव थे और उसी वक्त अशुभकर्म का बंध हुआ लेकिन उसका दुख तो 27वें भव में यानी प्रभु महावीर के तीर्थंकर वाले भव में आया, जब प्रभु के कान में कीले ठोकी गई।
→ राजकुमारी ने पोपट यानी Parrot के पंख काटते वक्त तीव्र अशुभभाव से उसी वक्त पर अशुभकर्म बाँध लिया लेकिन उसका फल उसको कलावती के भव में मिला। उसके दो हाथ काटे गए।
तो इसके भी हजारों दृष्टांत हमको जिनागमों में मिल जाते हैं। अब हम उदाहरण को छोड़कर मुख्य बात पर आते हैं।
1. मान लो कि हम 10 Seconds लेते हैं। उसमें 1-2-5-7-10 इतनी Seconds पर शुभभाव था और 3-4-6-8-9 Seconds पर अशुभभाव था तो यह Fix है कि 1-2-5-7-10 Seconds पर शुभकर्म का बंध होगा और 3-4-6-8-9 Seconds पर अशुभकर्म का बंध होगा।
2. प्रभु पूजा के लिए हम स्नान कर रहे हैं तो ‘मुझे पूजा के लिए स्नान करना है’ यह शुभभाव है। उस वक्त पुण्य कर्म का बंध होगा।
‘मुझे छानकर पानी लेना है और कम Use करना है। जयणा का भाव है, साबुन-Shampoo नहीं Use करना है’ यह भाव शुभ है, तो उस वक्त पर पुण्य का बंध होगा।
स्नान के वक्त हाथ पर, पैर पर लगा हुआ मैल देखकर मन बिगड़ा तो यह जुगुप्सा नाम का अशुभभाव है तो उस वक्त पर पाप का बंध, पानी और हाथ से घिस-घिसकर मैल निकला और अब गोरी चमड़ी देखकर राग हुआ तो यह अशुभभाव है, तो पाप का बंध।
स्नान के बाद पूजा के कपड़े पहनते वक्त ‘मैं आज अष्टप्रकारी पूजा करूंगा’ ऐसा भाव है तो यह शुभभाव है, उस समय पुण्य का बंध। Mirror में बाल बनाते वक्त खुद का रूप देखकर राग हुआ तो अशुभभाव है, तो पाप का बंध।
बाल बनाने के बाद उसको देखकर राग तो पाप का बंध। मंदिर का Bag तैयार करते वक्त ‘आज तो मंदिर में आम चढ़ाना है’ ऐसा शुभभाव है तो पुण्य का बंध।
रास्ते पर जा रहे हैं और Movie का Poster देखकर विकार आया तो पाप का बंध। कोई गरीब को देखकर करुणा से 10 रूपए दे दिए तो पुण्य का बंध।
किसी Cycle वाले की थोड़ी सी टक्कर लगी और गुस्सा आया और भड़क गए तो पाप का बंध। वापस मन में हुआ कि ‘गुस्सा नहीं करना है, क्षमा भाव रखना है’ तो पुण्य का बंध।
मंदिर में प्रभु दर्शन करके शुभ भाव आया तो पुण्य का बंध। उसी वक्त बीच में प्रभु के पास कोई युवान स्त्री का अद्भुत रूप देखकर राग हुआ तो पाप का बंध।
स्त्री के लिए पुरुष और पुरुष के लिए स्त्री इस तरह से समझना है। नजर हटाकर स्तुति बोलने लगे और उसमें शुभ भाव बढे, तो पुण्य का बंध। लाइन में खड़े थे और किसी को बीच में घुसते हुए देखकर गुस्सा आया तो पाप का बंध।
पूजा करते वक्त मन शुभ भाव में मस्त बना तो पुण्य का बंध। प्रभु को चढ़ाया हुआ सोने का हार देखकर सोचा कि ‘ऐसा ही हार मुझे मेरी Wife को बनाकर देना है’ तो पाप का बंध।
पूजा के लिए जो एक घंटा बीता उसमें 3600 सेकंड बीती और हर एक सेकंड में अलग-अलग भाव है तो अगर 2500 Seconds में शुभभाव है तो उस वक्त पुण्य बंध है और 1100 Seconds में अशुभभाव है तो उस वक्त पाप बंध है।
2500 Seconds के शुभभाव Weak-कच्चे होंगे तो पुण्य बंध कम होगा और 1100 Seconds के अशुभभाव Strong होंगे तो पाप बंध भयंकर होगा।
उसके सामने अगर 3500 सेकंड अशुभभाव थे लेकिन 100 सेकंड के शुभभाव एकदम Powerful हो तो Overall पुण्य कर्म बहुत-बहुत-बहुत अधिक मात्रा में होगा और पाप कर्म बहुत कम होगा।
यह तो सिर्फ एक Example है। इसके आधार पर हर रोज के 24 घंटे का सोच लेना है।
इसके लिए जागृत रहना पड़ेगा, Presence of Mind is Must. हर समय हमें खुद को यानी अंतर्मन को देखते रहने है कि अंदर क्या चल रहा है।
शुरू शुरू में थोडा मुश्किल हो सकता है Disconnection होगा फिर से Connection होगा लेकिन धीरे धीरे यह Practice कर सकते हैं।
ज्ञानी गुरु भगवंत 1 साल तक सिर्फ इस विषय पर रोज एक घंटा आसानी से बोल पाए इतना यह विराट Subject है।


