सद्गुरु परमात्मा
सद्गुरु परमात्मा, मारो एकज नाथ,
तारा शरणमां रहेवुं मने हवे, छोडुना तारो साथ..
तारी कृपाथी मल्यु आ जीवन,
तुज चरणोंमां करवुं छे अर्पण,
तुज आण काजे प्राण त्यजुं हुं,
एवुं चाहुं आत्मसमर्पण,
आपीने गुणनो भंडार,
बदली दो दीननो देदार;
अनाथने करजो सनाथ….
(तारा शरणमां रहेवुं… (1)
आवे मुसीबत हजारो तो पण,
तुज मारग ने कदी ना त्यजुं..
माथे कफ़न बाँधी लडतो रहूं,
आ देहनी परवाह जरी ना करूँ..
छूटे ज्यारे छेल्लो श्वास,
तुं ही ज हो आसपास;
माथे हो तारो ज हाथ…
(तारा शरणमां रहेवुं… (2)
तारी ख़ुशीमां ज मारी ख़ुशी छे,
तारा ज दुःखमां मुजनें दुःख छे;
तुजथी ज सघलुं ने तुजमां ज सघलुं,
तारा ज चरणोंमां साचुं सुख छे,
आपी दे चरणोंमां वास,
रहेवुं बनी तारो दास;
तुम सम थाउ जगनाथ…
(तारा शरणमां रहेवुं… (3)
Lyrics ✍️ : Pujya Sadhu Bhagwant
Singer 🎤 & Composition 🎶 : Jaydeep Swadia
Samvedna : Nirjara Alpesh Jain
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