महासती ऋषिदत्ता को मिली भयानक सजा।
Just Imagine.. आपके शहर में हर रोज़ रात को एक हत्या हो रही हो और हर रात को आपके Life Partner के चहरे पर खून के दाग लगे हो.. अब बताइए उस पर विश्वास करेंगे या शक? ऐसी ही कुछ Situation से कनकरथ को गुज़रना पड़ा था।
प्रस्तुत है महासती ऋषिदत्ता की अद्भुत कथा का Episode 02..
कनकरथ राजकुमार कोबेरी की राजकुमारी रुक्मिणी के साथ विवाह करने के लिए निकला था लेकिन बीच मार्ग में ऋषिदत्ता के साथ विवाह हो जाने के कारण से उसने रुक्मिणी के साथ विवाह करने का विचार ही छोड़ दिया था और फिर से अपने नगर रथमर्दननगर लौट गया था।
इतना हमने Episode 01 में देखा था।
खतरनाक षड्यंत्र
रुक्मिणी वहां पर कनकरथ का इंतज़ार कर रही थी लेकिन जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला कि उसके होनेवाले पति ने बीच रास्ते में ही ऋषिदत्ता नामक कन्या के साथ शादी कर ली है तब उसे बहुत बड़ा आघात लगा, उसके आघात का पार नहीं रहा।
रुक्मिणी किसी और को अपने पति के रूप में नहीं देखना चाहती थी और वह चिंता में डूब गई कि क्या अब कनकरथ राजकुमार मेरे साथ विवाह नहीं करेगा? क्या इस जीवन में मैं उन्हें प्राप्त नहीं कर पाउंगी? और वह एकदम दुखी हो गई।
इस भयानक दुःख के दौरान रुक्मिणी का अचानक एक तंत्र मंत्र करने वाली, Black Magic करनेवाली योगिनी नारी से संपर्क हो गया।
रुक्मिणी ने सोचा कि ऐसे तो मेरे भावी पति मुझसे विवाह करने के लिए आनेवाले नहीं है, लेकिन इस योगिनी की मदद से वो ज़रूर आ सकेंगे। उसने योगिनी को Open Offer दिया कि यदि तुम मेरा एक कार्य करोगी तो मैं तुम्हे मुंह माँगा धन दूंगी।
योगिनी ने पूछा कौन सा कार्य? तो रुक्मिणी ने पूरी Situation बताई और कहा कि जब तक ऋषिदत्ता जीवित है तब तक राजकुमार कनकरथ यहाँ पर आकर मुझसे विवाह करें ऐसा लगता नहीं है।
इसलिए ऐसा कोई उपाय करो कि जिससे इस ऋषिदत्ता का पत्ता ही कट जाए और कनकरथ के साथ मेरा विवाह हो जाए। इस कार्य में जो कोई भी खर्चा आए वह सब मुझसे ले लेना।
वह योगिनी कनकरथ के नगर रथमर्दनपुर चली गई और अपनी कपट-लीला शुरू कर दी। उस योगिनी ने अपने तंत्र-मंत्र से, अपने Black Magic से नगर में किसी व्यक्ति की हत्या कर दी।
उसके बाद विद्या के बल से वह योगिनी गुप्त रूप से ऋषिदत्ता के Bedroom में पहुँच गई और उसने ऋषिदत्ता के चेहरे पर खून के दाग लगा दिए और उसके तकिये के पास, Pillow के पास मांस के टुकड़े बिखेर दिए और फिर वह योगिनी नगर में कहीं पर छुप गई।
इधर नगर में किसी पुरुष की हत्या होने से नगर में चारों ओर हाहाकार मच गया। हत्यारे को पकड़ने के लिए बहुत मेहनत की गई लेकिन हत्यारा पकड़ में नहीं आया।
पहला संदेह
नगर में हो रहे हाहाकार को सुनकर अपने शयनखंड में सो रहे कनकरथ की नींद भंग हो गई। अचानक उसने पास में सो रही ऋषिदत्ता के चेहरे को देखा। खून से लतपत चेहरे को देखकर कनकरथ धूज उठा।
उसने ऋषिदत्ता के Pillow के पास मांस के टुकड़े भी देखें तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गई।
उसने ऋषिदत्ता को जगाया और चेहरे पर लगे खून के दाग बताए। ऋषिदत्ता ने दर्पण में अपना चेहरा देखा तो उसके भी आश्चर्य का पार नहीं रहा। कनकरथ ने कारण पूछा तो ऋषिदत्ता ने कहा कि स्वामी मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है ये सब क्या है और कहाँ से आया।
कनकरथ के कहने से उसने अपना चेहरा साफ़ किया और मांस के टुकड़े बाहर फेंकवा दिए।
दूसरे दिन फिर से एक हत्या हुई, इस बार नगर के लोगों ने राजा को आकर कहा कि इस तरह रोज़-रोज़ हत्याएं हो रही है, इसलिए हत्यारे को पकड़कर उसे कठोर सजा दी जानी चाहिए। सैनिकों को आदेश दिया गया।
उन्होंने बहुत मेहनत की लेकिन कोई भी पकड़ में नहीं आया।
आखिरकार अनुमान लगाया गया कि कोई अदृश्य शक्तिवाला व्यक्ति ही इस प्रकार हत्याएं कर सकता है। फिर से Same घटना।
इधर दूसरे-तीसरे दिन भी रात्रि में भी जब कनकरथ ने अपनी पत्नी ऋषिदत्ता के चेहरे को खून से लतपत देखा तो उसे संदेह पैदा हुआ कि क्या मेरी पत्नी राक्षसी तो नहीं? क्या यही हर रोज़ नगर में हत्याएं तो नहीं कर रही है?
कनकरथ ने इस बार सीधे ही पूछ लिया ‘नगर में रोज़ हत्याएं हो रही है क्या यह कार्य तुम तो नहीं कर रही हो?’
कनकरथ का विश्वास
ऋषिदत्ता को बड़ा झटका लगा उसके कहा कि ‘आपके दिल में यह विचार भी कैसे आया? स्वामी मैंने अपने जीवन में ना तो कभी किसी जीव की हत्या की है और ना ही कभी मांसाहार किया है, क्या आप मेरे पूर्व जीवन से परिचित नहीं है?
मुझे लगता है कि मुझे बदनाम करने के लिए ही यह षड़यंत्र रचा जा रहा है, मेरे अशुभ कर्म उदय में आ रहे हैं, उसी का यह फल है, पता नहीं अब क्या होगा! मेरी Right आँख भी Blink हो रही है, इस आपत्ति में आप ही मेरे लिए परम आधार हो।’
ऐसा कहकर ऋषिदत्ता रो पड़ी। कनकरथ ने यह सब कुछ सुना तो उसने ऋषिदत्ता को आश्वासन दिया कि जब तक मेरे देह में प्राण है, तब तक मैं तेरा बाल भी बांका नहीं होने दूंगा, तुम निश्चिंत रहो।
लेकिन अब ये रोज़ का हो गया था, रोज़ हत्याएं होती, रोज़ कनकरथ मुंह साफ़ कराता।
एक दिन राजा हेमरथ ने मंत्रियों को कठोर शब्दों में आदेश दिया और कहा कि कुछ भी करो लेकिन इस दुष्ट हत्यारे को पकड़ो। मंत्री ने कहा कि राजन्! हत्या का यह दुष्ट कार्य करनेवाला कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है, कोई साधु-संन्यासी या फिर Black Magic करनेवाला बाबा-फकीर होना चाहिए।
राजा ने कहा कि ज़रूरत पड़े तो उन सबको नगर में से बाहर निकाल दो।
योगिनी की चाल
राजा के इस आदेश के बारे में उस योगिनी को पता चल गया था। उसने सोचा कि अब मुझे अपना कार्य जल्द से जल्द पूरा करना होगा। उसी दिन शाम को वह सीधे महाराजा हेमरथ के पास पहुँच गई और कहा कि राजन् मैं आपसे एकांत में मिलना चाहती हूँ।
और फिर अकले में राजा से कहा कि राजन् नगर में हो रही हत्याओं का भेद मुझे मिल गया है लेकिन आप मेरे शब्दों पर विश्वास नहीं करेंगे। राजा ने कहा कि अरे नहीं नहीं, जो सच है वह कहो ताकि इस Problem का Solution हो जाए।
योगिनी ने Manipulate करते हुए कहा कि राजन् कल ही सपने में किसी देव ने आकर मुझे कहा है कि नगर के सभी साधु-संन्यास तो निर्दोष है, नगर में हो रही हत्याओं का मूल तो राजमहल में ही है। मैंने देव से पूछा कि वह कौन है तो उसने कहा वह ऋषिदत्ता है।
राजन् आपके घर की बात मुझे Public में नहीं करनी चाहिए इसलिए प्रजा के हित को ध्यान में रखकर मैंने सीधा आपको ही एकांत में सत्य बता दिया, अब इसके लिए आपको जो उचित लगे आप कर सकते हैं, अपो मुझे जो भी सजा देनी हो वह दे सकते हैं, मैंने तो सिर्फ अपना कर्त्तव्य पूरा किया है।
राजा हेमरथ, ऋषिदत्ता का नाम सुनकर चौंक उठा कि विश्वास नहीं आ रहा है जंगल में पली बड़ी निर्दोष ऋषिकन्या ऋषिदत्ता ऐसा पाप कैसे कर सकती है!
योगिनी ने कहा कि आप विश्वास की बात तो छोड़ ही दीजिये, आज रात के समय में आप खुद ही उसकी करतूत देख सकते हैं, राजन् स्त्री की कपट-लीला को स्त्री ही जान सकती है, आज रात में आपको सब पता चल जाएगा।
इतना कहकर वह वहां से निकल गई।
भयानक कलंक
इधर शाम में जब राजकुमार कनकरथ अपने पिता यानी राजा हेमरथ से मिलने के लिए आया तो राजा ने कहा कि बेटा, आज मेरी तबियत थोड़ी ठीक नहीं है, आज मेरे पास ही रहना।
कनकरथ को Doubt आ गया कि क्या आज मेरी निर्दोष पत्नी पर कोई कलंक लगनेवाला है! हे प्रभु मैंने उसे विश्वास दिलाया है कि मेरे रहते कुछ नहीं होगा, प्रभु लाज तेरे ही हाथों में है।
इधर ऋषिदत्ता की Right आँख Blink होने लगी। कुछ अमंगल होनेवाला है इस भय से वह कांप उठी लेकिन प्रभु का स्मरण करते-करते वह लेट गई। इधर कनकरथ की नींद हराम हो चुकी थी।
रात में फिर से हत्या हुई। इस बार राजा के आदेश से गुप्तचर ने खिड़की में से झांककर ऋषिदत्ता के Room में देखा। वह चौंक उठा कि अरे बाप रे नगर के लोगों की हत्या करनेवाली तो यह राजा की पुत्र-वधू है।
राजा ने खुद अपनी आँखों से ऋषिदत्ता का खून से लतपत चेहरा देखा, पास में पड़े मांस के टुकड़े देखें। राजा हेमरथ आगबबूला हो गया और पुत्र कनकरथ से कहा कि अरे कुल का नाश करनेवाला कुलांगार! अपनी पत्नी के राक्षसी चरित्र को जानते हुए भी यह बात नहीं बताई।
कनकरथ ने अपनी पत्नी ऋषिदत्ता का बचाव करने की पूरी कोशिश की लेकिन राजा अपने पुत्र को ऋषिदत्ता के पास ले गया और सब कुछ बता दिया।
मृत्यु-दंड की सजा
अब Problem ये थी कि राजकुमार कनकरथ को पूरा विश्वास था कि मेरी पत्नी निर्दोष है, कोई दुष्ट व्यक्ति उसे फंसा रहा है लेकिन वह चाहे तो भी बचाव किस प्रकार से करें, किस Base पर करें?
राजा ने तुरंत दंड देने वाले अधिकारी को आदेश दिया कि इस दुष्टा राक्षसी को नगर के बाहर ले जाकर मार डालो। राजा की आज्ञा होते ही अगले दिन उस महासती ऋषिदत्ता का चेहरा काला करके नगर में उसे घुमाया गया और वह दंड देने वाले अधिकारी उसे शमशान घाट पर ले गए।
नगरवासी भी वहां पर पहुँच गए और आँखों से आंसू बहाने लगे। यह दृश्य देखकर वे अधिकारी उसे भयानक जंगल में ले गए। जैसे ही उसे ख़त्म करने के लिए तलवार उठाई वैसे ही भय से ऋषिदत्ता बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ी।
अधिकारी को लगा कि यह स्वयं ही मर गई है तो इसे मारने की अब ज़रूरत नहीं है। इस प्रकार तलवार से वार किए बिना ही उसे ऐसे ही छोड़कर अधिकारी वापस लौट गए और राजा को कह दिया कि ऋषिदत्ता की हत्या कर दी है।
यह समाचार सुनते ही कनकरथ बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
राजा और रानी ने पानी छांटकर उसे जगाया और ऋषिदत्ता को भूल जाने को कहा।
राजा की नज़र में वह दोषित थी, राजकुमार की नज़र में निर्दोष थी लेकिन समस्या यह थी कि किस आधार पर वह निर्दोषता साबित करता क्योंकि सारे Evidences तो ऋषिदत्ता के खिलाफ ही जा रहे थे।
जंगल में नया जीवन
उधर जंगल में ऋषिदत्ता बेहोश पड़ी थी। धीरे धीरे रात के समय में हवा के लहरों से ऋषिदत्ता होश में आई। सुबह हुई लेकिन जीवन में अंधकार जैसा हो गया था।
वह खुद को कहने लगी कि हे आत्मन् पिछले जन्म में हँसते हँसते पाप किए थे, इसलिए आज तेरी यह हालत हुई है, पाप कर्मों की सजा भुगते बिना कोई रास्ता नहीं है, ख़ुशी ख़ुशी पाप किए थे, अब ख़ुशी ख़ुशी सहन कर, क्योंकि रोते रोते सहन करने से वे पाप कर्म छूटने वाले नहीं है उल्टा नए पाप कर्मों का बंध ही होनेवाला है।
पिछले जन्म में ज़रूर किसी पर झूठा आरोप लगाया होगा इसलिए आज निर्दोष होते हुए भी कलंकित बनी है। इस प्रकार शुभ विचारों द्वारा खुद को समझाने लगी।
हम सोच रहे होंगे कि यह कलंक आखिर क्यों लगा?
तो इसके पीछे भी एक राज़ है.. वह आगे की Story में पता चलेगा।
ऋषिकुमार का रहस्य
वह जंगल में आगे बढती गई और Coincidentally वह अपने पिता के आश्रम में पहुँच गई।
वहां पर जाकर वह अपने पिता की याद में बहुत रोई। आखिरकार जंगल में फल वगैरह खाकर अपने पिता की झोपडी में रहकर दुःख के दिन व्यतीत करने लगी।
अचानक उसे विचार आया कि मैं अपने शील की रक्षा इस जंगल में कैसे कर पाउंगी। सोचते सोचते उसे याद आया कि अहो! मेरे पिता ने एक औषधि बताई थी जिसकी मदद से मैं अपने आपको पुरुष के रूप में बदल सकती हूँ।
ऋषिदत्ता उस औषधि की खोज में निकली और उसे वह औषधि मिल गई। उसे खाकर वह पुरुष के रूप में बदल गई।
ऋषिदत्ता “ऋषिकुमार” के रूप में उस आश्रम में रहने लगी और परमात्मा की पूजा-भक्ति आदि करके अपना समय बिताने लगी।
शील की रक्षा के लिए एक महासती किसी भी हद तक जा सकती है।
Moral Of The Story
यहाँ पर जानने जैसी बात यह है कि
1. आज का ज़माना शायद कहेगा कि हमारे पास ऋषिदत्ता जैसी Beauty होती तो हम तो Reels बनाकर Followers Gain करते, Views बटोरते, लेकिन महासती महासती होती है.. वह शील की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, एक महासती, एक शीलवान नारी Reel के चक्कर में Sheel के साथ Compromise नहीं करेगी।
2. जब कर्मों का उदय होता है तब उन कर्मों का उदय सहन करने की ताकत महापुरुषों में ही होती है। वे दोष अपने किए कर्मों को देते हैं, व्यक्ति या वस्तुओं को नहीं।
3. शास्त्रों में साध्वीजी भगवंतों के लिए भी अपनी शील की रक्षा के लिए कुब्जा यानी कि पीठ से, गर्दन से झुक जाने की विधि आती है। ऋषिदत्ता ने पुरुष के स्वरुप में खुद को Transfer किया, पर अपने Character को, शील को Compromise नहीं किया।
4. व्यक्ति जब राग में पागल हो जाता है तब वह किस हद तक गिर सकता है, वह हमें रुक्मिणी की Mentality से पता चलता है। खुद का स्थान कोई ले ले, तो किसी भी हद तक जाकर वह अपना स्थान Fix करने की मेहनत करता है, वह स्थान छीनने की मेहनत करता है और उसमें सामनेवाले की हत्या भी हो जाए, तो भी उसके लिए No Problem है.. सोचने जैसा है राग कितनी खतरनाक चीज़ है।
5. कई बार Husbands का Sandwich कैसे होता है वह भी हमें इस घटना से पता चलता है। वह ना चाहे, तो भी उसे क्या क्या Face करना पड़ता है, वह भी हमें पता चलता है। हर समय कुछ भी निर्णय लेने से पहले वह व्यक्ति किस परिस्थिति से गुज़र रहा है, उसका भी सोच-विचार करना चाहिए।
6. कनकरथ ने क्या कहा था? तेरा बाल भी बांका नहीं होने दूंगा.. लेकिन वह कुछ भी नहीं कर पाया। कर्मों के सामने किसी की नहीं चलती है।
क्या कनकरथ ऋषिदत्ता को भूलकर रुक्मिणी से शादी कर लेगा.. क्या कनकरथ का ऋषिदत्ता से वापस कभी मिलना होगा और होगा तो भी पहचानेगा कैसे क्योंकि वह तो अब पुरुष के रूप में बदल गई है.. ऋषिकुमार बन गया है।
और मान लो अगर मिलना होता भी है तो क्या ऋषिदत्ता वापस कनकरथ को स्वीकार पाएगी? क्या रुक्मिणी का काँटा हट गया है या उसके पाप का उजागर होगा?
जानेंगे अगले Episode में।


