Navkar Mahamantra : 7 Secrets & the Essence of 14 Purvas

क्या है नमस्कार महामंत्र का रहस्य?

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By Jain Media 13 Min Read
Highlights
  • जैन धर्म में सबसे Important और First कोई चीज़ है तो वह है नवकार महामंत्र
  • नवकार महामंत्र शाश्वत (Immortal) है
  • नवकार महामंत्र चौदह पुर्वों का सार है

नवकार का रहस्य

🎶 समरो मंत्र भलो नवकार, ऐ छे चौद पूरवनो सार।
एना महिमानो नहिं पार, एनो अर्थ अनंत अपार॥ 🎶

आखिरकार नवकार मंत्र को चौदह पूर्व का सार क्यों कहा जाता है?

प्रभु महावीर स्वामी के चरणों में वंदन करते हुए आज से हम Jain Media पर Basics of Jainism की Series शुरू कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत जैन धर्म के Basic Principles को सरल भाषा में गहराई से जानने का प्रयास करेंगे। 

तो प्रस्तुत है Basics of Jainism का Episode 01

जीवनभर नवकार 

ऐसा कह सकते हैं कि जैन धर्म में सबसे Important और First कोई चीज़ है तो वह है नवकार महामंत्र।

अपने आप को जो जैन कहता है, उसे कुछ आता हो या ना भी आता हो लेकिन उसे नवकार महामंत्र तो अवश्य आता ही होगा। जो परिवार अपने आप को जैन धर्मी मानता है, उस परिवार में जब संतान का जन्म होता है तो सबसे पहले उस संतान के कान में नवकार महामंत्र सुनाया जाता है।

छोटे-छोटे बालक जब पाठशाला जाना शुरू करते हैं, तब सबसे पहले उन्हें नवकार महामंत्र सिखाया जाता है। मृत्यु के समय में भी नवकार महामंत्र विशेष सुनाया जाता है, जिससे उस आत्मा को सद्गति की प्राप्ति हो। 

शाश्वत महामंत्र

नवकार महामंत्र अथवा नमस्कार महामंत्र को पंचनमस्कार, पंचनमोक्कारो, पंचपरमेष्ठी नमस्कार, पंच-मंगल-महाश्रुतस्कंध आदि भी कहते हैं।

सूत्र एवं अर्थ से यह शाश्वत (Immortal) है यानी सूत्र Means Letters और अर्थ Means Meaning से तीनों काल में नवकार महामंत्र एक जैसा ही रहता है.. No Change in Meaning or Letters.

नवकार महामंत्र में 68 अक्षर होते हैं और शास्त्रों की दृष्टी से यह मंत्र सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वर्तमान समय में नवकार महामंत्र जो हम रोज़ बोलते हैं, वह प्राकृत रूप में प्रसिद्ध है। 

सुख की दिशा

हर जीव को सुख चाहिए.. Right? किसी को भी दुःख नहीं ही चाहिए। हर कोई इस दुनिया में अलग-अलग चीज़ों के पीछे भाग रहा है, लेकिन आखिर तो उद्देश्य यही होता है कि उसे खुश होना है, उसे ख़ुशी चाहिए, सुखी होना है, Happiness..

अनादी काल से हमने पुद्गलों में, जड़ में यानी Materialistic चीज़ों में ही सुख को माना है और इसलिए उसके पीछे ही दौड़ रहे हैं। लेकिन Reality इससे विपरीत है, सुख पुद्गलों में नहीं है बल्कि गुणों की प्राप्ति में हैं, सुख बाहर नहीं बल्कि अंदर है।

सुख राग-द्वेष में नहीं बल्कि राग द्वेष को ख़त्म करने में हैं। अब ये Reality समझने में कई दिन, हफ्ते या महीने नहीं बल्कि जन्मो-जन्म बीत जाते हैं लेकिन हम इस Reality तक नहीं पहुँच पाते हैं।

जो इस Reality को समझ जाते हैं वे फिर Real Happiness, Ultimate Happiness, Real सुख की तरफ आगे बढ़ते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति करते हैं।

अब एक बार सोचिए जिसे Madhya Pradesh से कश्मीर की तरफ जाना हो, वह कन्याकुमारी की तरफ जाए तो क्या उसे कश्मीर मिलेगा? नहीं ही मिलनेवाला Right?

अब बीच रास्ते में उसे कोई रोके और कहे कि भाई.. आप South की तरफ जा रहे है और कश्मीर तो North की तरफ जाने से मिलेगा। उसे ज़रूर कुछ समय के लिए निराशा होगी कि धत्त यह मैंने क्या कर दिया.. जाना था कश्मीर और जा रहा हूँ कन्याकुमारी की तरफ..

लेकिन सही रास्ता बतानेवाले के प्रति उसे कितना Respect जगेगा ना कि इस व्यक्ति ने मुझे बचा लिया वरना मैं कभी कश्मीर की तरफ पहुँचता ही नहीं।

बस इसी तरह से इस संसार में सही रास्ता बतानेवाले, सही मंजिल पर पहुँच चुके एवं सही रास्ते पर चल रहे ऐसे अरिहंत आदि पूज्यों को इस मंत्र में नमस्कार किया गया है, इसलिए इस दुनिया में नवकार महामंत्र का महत्त्व सबसे ज्यादा है।

चौदह पूर्व का सार

नवकार महामंत्र को चौदह पूर्व का सार कहा जाता है ऐसा क्यों?

सार अर्थात् रहस्य। चौदह पूर्व का अर्थ सरल भाषा में पहले समझ लेते हैं। एक बड़े Middle Age के हाथी का वज़न कीजिए। उस हाथी का जितना Weight है, उतनी सूखी Ink लीजिये।

उसमें पानी Mix कीजिए और फिर लिखना शुरू कीजिए। जितने Pages लिखे जाएंगे, उतने Pages यानी एक पूर्व। यह हुई पहले पूर्व की बात। 2nd पूर्व इससे Double। 3rd पूर्व 2nd पूर्व का Double।

इस तरह Double Double करते जाइए! कुल 16383 हाथी का जो Calculation होगा.. वह 14 पूर्व होंगे। 

अब समझते हैं चौदह पूर्व का सार का रहस्य क्या है? तो चौदह पूर्व का रहस्य इस दुनिया के Supreme Beings यानी अरिहंत और सिद्ध अवस्था की प्राप्ति है।

अरिहंत यानी क्या? सिद्ध यानी क्या? यह हम अगले अगले Episode में समझते जाएंगे।

इतना समझ लीजिए कि अरिहंत और सिद्ध अवस्था यह श्रेष्ठ अवस्था है, इसे Ultimate Goal अथवा Ultimate Happiness भी कह सकते हैं।

अब जैसे चौदह पूर्व पढ़कर Ultimate Goal यानी Ultimate Happiness प्राप्त किया जाता है, वैसे ही नवकार महामंत्र के ध्यान से भी यही Ultimate Goal, Ultimate Happiness प्राप्त कर सकते हैं यानी कि जो काम चौदह पूर्व करता है, वही काम 68 अक्षरों वाला नवकार महामंत्र कर सकता है।

इसलिए नवकार महामंत्र को चौदह पूर्व का सार कहा जाता है। 

अब जानिए एक बहुत ही Interesting बात।

जो चौदह पूर्व का ज्ञान प्राप्त करते हैं, जो आगे से पीछे यानी Ascending Order में, पीछे से आगे यानी Descending Order में एवं बिना कोई क्रम के यानी Random Order में अंतर्मुहूर्त जितने समय में यानी 48 Minutes से कम समय में यह चौदह पूर्व के ज्ञान का जो पुनरावर्तन यानी Revision कर सकते हैं, ऐसे महापुरुष भी अंतिम समय में चौदह पूर्व का स्मरण ना करते हुए, चौदह पूर्व का सार नवकार महामंत्र का स्मरण करते हैं। 

नवकार का फल

प्रश्न उठ सकता है कि चलो मान लेते हैं कि Spiritual Happiness यानी Ultimate Happiness नवकार महामंत्र से मिल सकता है.. तो इसका अर्थ तो यह हुआ ना कि जगत के जो सुख है यानी Materialistic सुख है वह तो नवकार से नहीं मिल सकता ना?

तो फिर नवकार तो सिर्फ Spiritual लोगों के लिए सही हुआ.. हम जैसे संसारियों के लिए तो इसका कोई अर्थ ही नहीं?

प्रश्न बहुत Logical है.. अब Logical जवाब देख लेते हैं।

जो भी भौतिक सुख हमें मिलते हैं, वह पुण्य से ही मिलते हैं Right.. भौतिक सुख का जो Extreme Level होता है, उनमें से एक है चक्रवर्ती। चक्रवर्ती की संपत्ति, ताकत, परिवार आदि का वैभव कितना विशाल होता है, वह हमने सुना ही होगा।

अब बाहरी दृष्टी से देखें तो यह वैभव तो नवकार में नहीं दिखेगा। लेकिन यह चक्रवर्ती पद धर्म की विशिष्ट आराधना करने से जो पुण्य का बंध हुआ था, उसी से मिल सकता है।

ज़रूरी नहीं कि इसी जन्म में.. वह धर्म आराधना पूर्व के किसी जन्म में की हो और उसका उदय अब आया हो ऐसा भी हो सकता है। यह भी हो सकता है कि एक लाख जन्म पहले वह पुण्य का बंध किया हो लेकिन उदय में अब यानी एक लाख जन्म बाद आया हो, यह भी हो सकता है। 

अब यह पुण्य क्या? बंध क्या? कर्म क्या? उदय क्या? यह भी भविष्य के Episodes में हम देख लेंगे। 

लेकिन आखिर तो Root Cause वह धर्म की विशिष्ट आराधना ही हुई। अब धर्म की विशिष्ट आराधना में भी नवकार की आराधना का समावेश तो हो ही जाता है।

अर्थात् दुनिया में जो भी Extra Ordinary चीज़ें हैं, फिर चाहे वह पद हो, संपत्ति हो, प्रतिष्ठा हो, अच्छा परिवार हो यह सब Directly या Indirectly नवकार मंत्र से प्राप्त होता है। 

तो भौतिक सुख के लिए भी नवकार महामंत्र का ही स्मरण करें तो? यह एक पूरा अलग Topic है फिर कभी देखेंगे।

लेकिन इतना तो Clear हो जाता है कि Spiritual Happiness हो या Materialistic Happiness, Root Cause तो नवकार महामंत्र है, यह मानना ही पड़ेगा। भौतिक ऋद्धि समृद्धि की प्राप्ति यह नवकार का मामूली फल है.. नवकार की Actual ताकत तो मोक्ष तक ले जाने की है। 

नवकार की आराधना

नवकार महामंत्र की महिमा तो समझ में आ गई तो फिर नवकार महामंत्र की आराधना किस तरह करनी चाहिए?

सही बात यह है कि ज्ञानी गुरु भगवंतों के पास से ही यह जानकारी लेनी चाहिए लेकिन तब तक Daily Routine में एक काम कर सकते हैं जो सामान्य तौर पर पाठशाला आदि में भी सिखाया जाता है।

सोते 7, उठते 8 यानी सोने से पहले 7 प्रकार के भय से मुक्त होने के लिए 7 नवकार गिनने और उठते ही सबसे पहले 8 कर्मों से मुक्त होने के लिए 8 नवकार महामंत्र गिनने चाहिए।

इसी के साथ भोजन करने से पहले 3 नवकार महामंत्र एवं घर से निकलने से पहले 3 नवकार गिन सकते हैं और रोज़ Fix समय निश्चित करके 108 नवकार एक साथ गिन सकते हैं।

इससे हमारे अंदर आध्यात्मिक उर्जा बढ़ेगी। इससे विघ्न का यानी Life में आ रही Hurdles का भी नाश हो सकता है.. अगर ना हो तो भी उन Hurdles के बीच हमारी हिम्मत, हमारे मन की समाधि बनी रहती है। कुछ जैन साधु-साध्वीजी भगवंत तो अपने पूरे जीवन में लाखों, करोड़ों नवकार महामंत्र का जाप करते हैं।

कई बार ऐसी घटनाएं हुई है कि जिन्होंने अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा नवकार महामंत्र गिनकर आत्मसात किया हो और उनके जीवन में कर्म के उदय के कारण कोई बहुत बड़ी बीमारी आई हो, तकलीफ आई हो और याददाश्त चली गई हो, वे सब कुछ भूल जाते हैं लेकिन नवकार महामंत्र नहीं भूलते।

नवकार का चमत्कार

अमर कुमार की एक कहानी आती है, श्रेणिक महाराजा के समय में बालक अमर कुमार की बलि देने के लिए पूरी तैयारियां की जाती है और फिर उसे अग्नि के हवाले कर दिया जाता है और बालक अमर कुमार आँख बंद करके अटूट श्रद्धा रखकर नवकार महामंत्र गिनना शुरू करता है।

नवकार महामंत्र के प्रभाव से वह अग्नि सिंहासन में बदल जाती है।

यह पूरी कथा हम भविष्य में ज़रूर देखने का प्रयास करेंगे।

नवकार की महिमा

लेकिन कहने का तात्पर्य यह है कि इस तरह नवकार महामंत्र से जुड़े अनेकों चमत्कार शास्त्रों में भरे पड़े हैं। हमारा Logical दिमाग यही सोचेगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई नवकार गिने और आग-सिंहासन में बदल जाए, सांप-फूलों की माला में बदल जाए..

तो देखिए नवकार में Supreme Beings का नाम जब भाव से, पूरी श्रद्धा से लेकर उन्हें नमस्कार किया जाता है, तब कुदरत को भी मजबूर होना पड़ता है और तब जाकर के चमत्कार का सर्जन होता है।

अब यह बात को Experience करने के लिए अपने-अपने जीवन में नवकार महामंत्र के ऊपर अटूट श्रद्धा रखकर देख सकते हैं।

तो हमने बहुत ही संक्षेप में नवकार महामंत्र के बारे में जाना।
Detail में अगर आप जानना चाहते हैं तो ज्ञानी सद्गुरु भगवंतों से मिलकर जान सकते हैं।

अगले Episode में जानेंगे नमो अरिहंताणं का अर्थ।

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